Advertisements
Advertisements
प्रश्न
चञ्चल: व्याघ्रं कुत्र दृष्टवान्?
Advertisements
उत्तर
जाले।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
व्याधस्य नाम किम् आसीत्?
कस्मै किमपि अकार्यं न भवति।
बदरी-गुल्मानां पृष्ठे का निलीना आसीत्?
निःसहायो व्याध: किमयाचत?
व्याघ्रस्य पिपासा कथं शान्ता अभवत्?
जाले पुनः बद्धं व्याघ्रं दृष्ट्वा व्याध: किम् अकरोत्?
अधोलिखितानि वाक्यानि कः/का कं/कां प्रति कथयति
| कः/का | कं/कां | |
| अहं त्वत्कृते धर्मम् आचरितवान् त्वया मिथ्या भणितम्। | ______ | ______ |
अधोलिखितानि वाक्यानि कः/का कं/कां प्रति कथयति-
| कः/का | कं/कां | |
| यत्र कुत्रापि छेदनं कुर्वन्ति। | ______ | ______ |
रेखांकित पदमाधृत्य प्रश्ननिर्माण–
व्याध: व्याघ्रं जालात् बहिः निरसारयत्।
रेखांकित पदमाधृत्य प्रश्ननिर्माण–
चञ्चलः वृक्षम् उपगम्य अपृच्छत्।
यथानिर्देशमुत्तरत-
सः लोमशिकायै सर्वां कथां न्यवेदयत् - अस्मिन् वाक्ये विशेषणपदं किम्?
यथानिर्देशमुत्तरत–
सर्वः स्वार्थं समीहते’, अस्मिन् वाक्ये कर्तृपदं किम्?
उदाहरणानुसारं रिक्तस्थानानि पूरयत–
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
| यथा-मातृ (प्रथमा) | माता | मातरौ | मातरः |
| स्वसृ (प्रथमा) | ______ | ______ | ______ |
उदाहरणानुसारं रिक्तस्थानानि पूरयत–
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
| यथा-स्वसृ (सप्तमी) | स्वसरि | स्वस्रो: | स्वसृषु |
| मातृ (सप्तमी) | ______ | ______ | ______ |
उदाहरणानुसारं रिक्तस्थानानि पूरयत–
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
| यथा-स्वसृ (षष्ठी) | स्वसुः | स्वस्रो: | स्वसणाम् |
| मातृ (षष्ठी) | ______ | ______ | ______ |
धातुं प्रत्ययं च लिखत–
| पदानि | = | धातुः | + | प्रत्ययः |
| कृत्वा | = | ______ | + | ______ |
सर्वः किं समीहते?
