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चंद्रशेखर वेंकट रामन् को वैज्ञानिक चेतना का वाहक क्यों कहा गया है? पठित पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

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प्रश्न

चंद्रशेखर वेंकट रामन् को वैज्ञानिक चेतना का वाहक क्यों कहा गया है? पठित पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

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उत्तर

चंद्रशेखर वेंकट रामन् अत्यंत प्रतिभाशाली और अनुसंधान के प्रति पूर्णतया समर्पित वैज्ञानिक थे। उन्होंने भारत सरकार के वित्तमंत्रालय में उच्च सुविधावाली प्रतिष्ठित नौकरी छोड़कर कलकत्ता विश्वविद्यालय में इसलिए नौकरी कर ली ताकि वे शोध के लिए भरपूर समय निकाल सके। इसके अलावा उन्होंने खुद को प्रयोगों एवं शोधपत्रों तक ही सीमित नहीं रखा बल्कि अपने भीतर राष्ट्रीय चेतना बनाए रखते हुए देश में वैज्ञानिक दृष्टि और चिंतन के विकास के प्रति समर्पित रहे। उन्होंने सैकड़ों छात्रों की मदद उनके शोध में की। इन कारणों से रामन् को वैज्ञानिक चेतना का वाहक कहा गया है।

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गद्य (Prose) (Class 9 B)
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  1. कङ्घा, पतङ्ग, चञ्चल, ठण्डा, सम्बन्ध।
  2. कंघा, पतंग, चंचल, ठंडा, संबंध।
  3. अक्षुण्ण, सम्मिलित, दुअन्नी, चवन्नी, अन्न।
  4. संशय, संसद्, संरचना, संवाद, संहार।
  5. अँधेरा, बाँट, मुँह, ईंट, महिलाएँ, में, मैं।

ध्यान दो कि ङ, ज्, ण, न् और म् ये पाँचों पंचमाक्षर कहलाते हैं। इनके लिखने की विधियाँ तुमने ऊपर देखीं-इसी रूप में या अनुस्वार के रूप में। इन्हें दोनों में से किसी भी तरीके से लिखा जा सकता है और दोनों ही शुद्ध हैं। हाँ, एक पंचमाक्षर जब दो बार आए तो अनुस्वार का प्रयोग नहीं होगा; जैसे-अम्मा, अन्न आदि। इसी प्रकार इनके बाद यदि अंतस्थ य, र, ल, व और ऊष्म श, ष, स, ह आदि हों तो अनुस्वार का प्रयोग होगा, परंतु उसका उच्चारण पंचम वर्गों में से किसी भी एक वर्ष की भाँति हो सकता है; जैसे-संशय, संरचना में ‘न्’, संवाद में ‘म्’ और संहार में ‘ङ’।
( ं) यह चिह्न है अनुस्वार का और ( ँ) यह चिह्न है अनुनासिक का। इन्हें क्रमशः बिंदु और चंद्र-बिंदु भी कहते हैं। दोनों के प्रयोग और उच्चारण में अंतर है। अनुस्वार को प्रयोग व्यंजन के साथ होता है अनुनासिक का स्वर के साथ।


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