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भीड़ के प्रमुख लक्षण क्या हैं? भीड़ के प्रमुख मनोवैज्ञानिक परिणामों की व्याख्या कीजिए। - Psychology (मनोविज्ञान)

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प्रश्न

भीड़ के प्रमुख लक्षण क्या हैं? भीड़ के प्रमुख मनोवैज्ञानिक परिणामों की व्याख्या कीजिए।

संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

भीड़ के संदर्भ उस असुस्थता की भावना से है। जिसका कारण यह है की हमारे आस - पास बहुत अधिक व्यक्ति या वस्तुएँ होती है जिससे हमें भौतिक बंधन की अनुभूति होती है। तथा कभी - कभी वैयक्तिक स्वंतत्रता में न्यूनता का अनुभव होता है। एक विशिष्ट क्षेत्र या दिक् में बड़ी संख्या में व्यक्तियों की उपस्थिति के प्रति व्यक्ति की प्रतिक्रिया ही भीड़ कहलाती है। जब यह संख्या एक निश्चित स्तर से अधिक हो जाती है तब इसके कारण वह व्यक्ति जो इस स्थिति में फंस गया है, दबाव का अनुभव करता है। इस अर्थ में भीड़ भी एक पर्यावरणी दबावकारक का उदाहरण है।

भीड़ के अनुभव के निम्लिखित लक्षण होते है :

a. असुरक्षा की भावना वैयक्तिक
b. स्वतंत्रता में न्यूनता या कमी, व्यक्ति का अपने आस - पास के परिवेश के संबंध में निशोधात्मक द्द्ष्टिकोंण तथा, सामाजिक अंत: क्रिया पर नियंत्रण के अभाव की भावना।
c. भीड़ के प्रमुख मनोवैज्ञानिक परिणाम : भीड़ तथा अधिक घनत्व के परिणामस्वरूप अपसामान्य

  1. व्यवहार तथा आक्रामकता उत्पत्र हो सकते है। अनेक वर्षो पूर्व चूहों पर किए गए शोध में यह परिलक्षित हुआ था। इन प्राणियों को एक बड़े में रखा गया, प्रारंभ में यह कम संख्या में थे। इस बंद स्थान में जैसे उनकी जनसंख्या बढ़ने लगी, उनमे आक्रामक तथा विचित्र व्यवहार प्रकट होने लगे, जैसे - दूसरे चूहों की पूँछ काट लेना। यह आक्रामक व्यवहार इस सिमा तक बढ़ा की अंततः ये प्राणी बड़ी संख्या में मर गए जिससे बाड़े में उनकी जनसंख्या फिर कम हो गई। मनुष्यो में भी जनसंख्या वृद्धि के साथ कभी - कभी हिंसात्मक अपराधों में वृद्धि पाई गई है।
  2. भीड़ के फ़लस्वरुप उन कठिन कार्यो का, जिनमें संज्ञानात्मक प्रक्रियाएँ निहित होती है, निष्पादन निम्रं स्तर का हो जाता है तथा स्मृति और संवेगात्मक दशा पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ये निषेधात्मक प्रभाव उन व्यक्तियों में अल्प मात्रा में परिलक्षित होते है जो भीड़ वाले परिवेश के आदि होते है।
  3. वे बच्चे जो अत्यधिक भीड़ वाले घरों में बड़े होते है, निचले स्तर के शैक्षिक निष्पादक प्रदर्शित करते है। यदि वे किसी कार्य पर निरंतर काम करते रहने की प्रवृति भी दुर्बल होती है। अपने माता - पिता के साथ वे अधिक द्वन्द का अनुभव करते है तथा उन्हें अपने परिवार से भी कम सहायता प्राप्त होती है।
  4. सामाजिक अंत:क्रिया की प्रकृति भी यह निर्धारित करती है की व्यक्ति भीड़ के प्रति किस सीमा तक प्रतिक्रिया करेगा। उदाहरण के लिए यदि अंत: क्रिया किसी आनंददायक सामाजिक अवसर पर होती है: जैसे - किसी प्रीतिभोज अथवा सार्वजनिक समारोह में, तब संभव है की उसी भौतिक स्थान में बड़ी संख्या में अनेक लोगो में उपस्थित कोई भी दबाव उत्पत्र करे। बल्कि, इसके फ़लस्वरुप सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ हो सकती है। इसके साथ ही, भीड़ भी सामाजिक अंतः क्रिया की प्रकृति को प्रभावित करती है।
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मनोविज्ञान तथा सामाजिक सरोकार
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अध्याय 8: मनोविज्ञान एवं जीवन - समीक्षात्मक प्रश्न [पृष्ठ १८५]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Psychology [Hindi] Class 12
अध्याय 8 मनोविज्ञान एवं जीवन
समीक्षात्मक प्रश्न | Q 4. | पृष्ठ १८५
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