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भावार्थ लिखिए : बिन आए सबहीं सुख भूले। आए ते अँग-अँग सब फूले।। सीरा भई लगावत छाती। क्‍यों सखि साजन? ना सखि पाती।। - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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प्रश्न

भावार्थ लिखिए : 

बिन आए सबहीं सुख भूले। आए ते अँग-अँग सब फूले।।
सीरा भई लगावत छाती। क्‍यों सखि साजन? ना सखि पाती।।

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उत्तर

पहली सहेली कहती है कि उसके न आने पर मैं सब सुख भूल जाती हूँ और जब वह आ जाता है तो मेरा अंग-अंग पुलकित होने लगता है। उसे सीने से लगाते ही मुझे ठंडक मिलती है। इस पर दूसरी सखी पूछती है कि हे सखी!, क्या वह साजन (प्रियतम) है? जवाब में पहली सहेली बताती है कि नहीं, वह पत्र है।

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ऐ सखि !
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अध्याय 1.06: ऐ सखि ! (पूरक पठन) - पाठ के आँगन में [पृष्ठ २०]

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बालभारती Hindi Lokbharati [English] Standard 9 Maharashtra State Board
अध्याय 1.06 ऐ सखि ! (पूरक पठन)
पाठ के आँगन में | Q (१) (ख) ३. | पृष्ठ २०
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