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महाराष्ट्र स्टेट बोर्डHSC Commerce (Hindi Medium) 12th Standard Board Exam [कक्षा १२]

बैंक के विभिन्न प्रकार स्पष्ट कीजिए।

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प्रश्न

बैंक के विभिन्न प्रकार स्पष्ट कीजिए।

स्पष्ट कीजिए
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उत्तर

  1. केंद्रीय बैंक: केंद्रीय बैंक देश की बैंकिंग व्यवस्था की सर्वोच्च वित्तीय संस्था होती है। प्रत्येक देश का अपना केंद्रीय बैंक होता है। भारत में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) केंद्रीय बैंक है। RBI की स्थापना 1935 में भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के अंतर्गत हुई थी। RBI के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
    1. मौद्रिक नीति का निर्माण करना।
    2. मुद्रा नोट जारी करना।
    3. सरकार के बैंकर के रूप में कार्य करना।
    4. वाणिज्यिक तथा अन्य बैंकों के बैंक के रूप में कार्य करना।
  2. वाणिज्यिक बैंक: वाणिज्यिक बैंक देश के आर्थिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये बैंक मुख्यतः जमा स्वीकार करने और ऋण देने का कार्य करते हैं। इनके प्रमुख तथा गौण कार्य होते हैं। भारत में वाणिज्यिक बैंकों को तीन समूहों में बाँटा गया है:
    1. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक: जिनमें पूँजी का अधिकांश भाग सरकार के पास होता है, जैसे बैंक ऑफ इंडिया, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया आदि।
    2. निजी क्षेत्र के बैंक: जिनका स्वामित्व निजी व्यक्तियों या समूहों के पास होता है, जैसे एक्सिस बैंक और HDFC बैंक।
    3. विदेशी बैंक: ऐसे बैंक जिनकी स्थापना भारत के बाहर हुई है, लेकिन उनकी शाखाएँ भारत में कार्य करती हैं, जैसे सिटीबैंक, HSBC, स्टैंडर्ड चार्टर्ड आदि।
  3. सहकारी बैंक: भारत में सहकारी बैंक भारतीय सहकारी संस्था अधिनियम तथा बैंकिंग विनियमन अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत और नियंत्रित होते हैं। ये बैंक मुख्यतः ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लोकप्रिय हैं। इनका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों, किसानों तथा लघु उद्योगों को ऋण उपलब्ध कराना है। सहकारी बैंक सामान्यतः तीन स्तरों पर कार्य करते हैं:
    1. प्राथमिक साख समितियाँ: ये गाँव स्तर पर कार्य करती हैं तथा अपने सदस्यों और जनता से जमा स्वीकार करती हैं।
    2. जिला केंद्रीय सहकारी बैंक: ये जिला स्तर पर कार्य करते हैं। ये जनता से जमा स्वीकार करते हैं तथा राज्य सहकारी बैंक से ऋण प्राप्त कर आगे ऋण वितरण करते हैं। 
    3. राज्य सहकारी बैंक: ये राज्य स्तर पर कार्य करते हैं तथा जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों और प्राथमिक साख समितियों को वित्त उपलब्ध कराते हैं।
  4. औद्योगिक विकास बैंक: ये वित्तीय संस्थाएँ उद्योगों को मध्यम और दीर्घकालीन ऋण प्रदान करती हैं। उदाहरण के रूप में IFCI, SFC तथा महाराष्ट्र राज्य वित्त निगम (MSFC) आदि आते हैं। इनके प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
    1. उद्योगों के विस्तार और आधुनिकीकरण हेतु मध्यम तथा दीर्घकालीन वित्त उपलब्ध कराना।
    2. सार्वजनिक कंपनियों द्वारा जारी अंशों का अभिग्रहण करना।
    3. डिबेंचर और बॉण्ड खरीदना।
  5. विनिमय बैंक: विनिमय बैंक तथा बड़े वाणिज्यिक बैंक विदेशी विनिमय संबंधी लेन-देन को सुगम बनाते हैं। उदाहरण के रूप में बार्कलेज बैंक और बैंक ऑफ टोक्यो आदि आते हैं। इनके प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
    1. विदेशी व्यापार के लेन-देन को वित्तीय सहायता देना।
    2. लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) जारी करना।
    3. विनिमय बिलों का डिस्काउंट करना।
    4. लाभांश, ब्याज तथा लाभ आदि की राशि का प्रेषण करना।
  6. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक: क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) की स्थापना 1975 में की गई थी। ये बैंक बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा प्रायोजित होते हैं। इनके पूँजी योगदान में केंद्र सरकार का 50%, राज्य सरकार का 15% तथा प्रायोजक बैंकों का 35% हिस्सा होता है। ये बैंक ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों से जमा स्वीकार करते हैं तथा छोटे और सीमांत किसानों, कृषि श्रमिकों और ग्रामीण कारीगरों को ऋण प्रदान करते हैं।
  7. बचत बैंक: बचत बैंक का मुख्य उद्देश्य लोगों में बचत की आदत को बढ़ावा देना है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में। डाक बचत बैंक, वाणिज्यिक बैंक तथा सहकारी बैंक इसके उदाहरण हैं।
  8. निवेश बैंक: ये बैंक अपने ग्राहकों को वित्तीय और परामर्श सेवाएँ प्रदान करते हैं। इनके ग्राहक मुख्यतः व्यावसायिक संस्थाएँ और सरकारी संगठन होते हैं। निवेश बैंक शोध कार्य करके तथा निवेश संबंधी सलाह देकर विलय और अधिग्रहण की प्रक्रिया में सहायता करते हैं। सामान्यतः ये बैंक सीधे आम जनता से लेन-देन नहीं करते।
  9. विशेषीकृत बैंक: ये बैंक विशेष क्षेत्रों में व्यवसाय स्थापित करने के लिए आवश्यक सहायता और सेवाएँ प्रदान करते हैं।
    1. निर्यात-आयात बैंक (EXIM): यह बैंक निर्यातकों और आयातकों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
    2.  भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI): यह बैंक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) को वित्त और विकास सहायता प्रदान करता है।
    3. राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) : यह कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों के वित्तपोषण की सर्वोच्च संस्था है। NABARD क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के माध्यम से अल्पकालीन और दीर्घकालीन ऋण उपलब्ध कराता है।
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