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प्रश्न
'बादल की आत्मकथा' इस विषय पर दस-पंद्रह वाक्यों में निबंध लिखने के लिए कहें।
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उत्तर
बादल की आत्मकथा
मैं बादल हूँ, प्रकृति की अनमोल कृति। मेरा जन्म समुद्र, नदियों और झीलों की भाप से हुआ। सूरज की गर्मी मुझे ऊपर उठाती है, और ठंडक मुझे आकार देती है। मैं आकाश में तैरता हूँ, सफेद, काले या ग्रे रंगों में, और हर पल नई आकृतियाँ बनाता हूँ। लोग मुझे कभी जानवरों, तो कभी परियों के आकार में देखते हैं और कल्पना करते हैं।
मेरा जीवन धरती के लिए अमूल्य है। जब खेत सूखने लगते हैं, और नदियाँ खाली होती हैं, तब मैं बारिश बनकर धरती को राहत देता हूँ। मैं फसलों को जीवन देता हूँ, नदियों को भरता हूँ, और जंगलों को हरा-भरा बनाता हूँ। कभी मैं गरजता हूँ, तो कभी बिजली चमकाकर डराता भी हूँ।
मेरा सफर हमेशा चलते रहता है। बारिश के बाद मैं जल चक्र में वापस चला जाता हूँ और फिर किसी नई जगह पर जन्म लेता हूँ। पर्वत, जंगल और शहर, सब मेरे साथी हैं। मैं केवल पानी ही नहीं बरसाता, बल्कि खुशी, राहत और उम्मीद भी लाता हूँ। मेरा जीवन त्याग और सेवा का प्रतीक है। यही मेरी आत्मकथा है।
