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प्रश्न
अपशिष्ट जल से स्वच्छ जल प्राप्त करने के प्रक्रम में सम्मिलित चरणों का वर्णन करिए।
संक्षेप में उत्तर
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उत्तर
अपशिष्ट जल का उपचार शारीरिक, रासायनिक और जैविक प्रक्रियाओं के माध्यम से होता है, जो अपशिष्ट जल में पाए जाने वाले भौतिक, रासायनिक और जैविक पदार्थों को हटाते हैं। साफ पानी प्राप्त करने के लिए अपशिष्ट जल के उपचार में निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं:
- बार स्क्रीन: अपशिष्ट जल को ऊर्ध्वाधर लगी छड़ों से बने शलाका छन्ने (बार स्क्रीन) से गुजारा जाता है। इससे अपशिष्ट जल में उपस्थित कपड़ों के टुकड़े, डंडियाँ, डिब्बे , प्लास्टिक के पैकेट, नैपकिन आदि जैसे बड़े साइज़ के संदुषक अलग हो जाते हैं।
- ग्रिट और बालू हटाना: अब वाहित अपशिष्ट जल को ग्रिरिट और बालू अलग करने की टंकी में ले जाया जाता है। इस टंकी में अपशिष्ट जल को कम प्रवाह से छोड़ा जाता है, जिससे उसमें उपस्थित बालू, ग्रिट और कंकड़-पत्थर उसकी पेंदी में बैठ जाते हैं।
- अवसादन टैंक: जल को एक ऐसी बड़ी टंकी में ले जाया जाता है, जिसका पेंदा मध्य भाग की ओर ढलान वाला होता है। जल को इस टंकी में कई घंटों तक रखा जाता है, जिससे मल जैसे ठोस उस की तली के मध्य भाग में बैठ जाते हैं। इन अशुद्धिरयों को खुरच कर बाहर निकाल दिया जाता है। यह आपंक (स्लज) होता है। अपशिष्ट जल में तैरने वाले तेल और ग्रीज जैसी अशुद्धियों को हटाने के लिए अपमथित्र (स्किमर) का उपयोग किया जाता है। इस प्रकार साफ़ किया गया, जल निर्मलीकृत जल कहलाता है।
- एरेटर: साफ किए गए पानी को एरेटर टैंक से गुजारा जाता है जहाँ पानी में हवा पंप की जाती है। यह एरोबिक बैक्टीरिया को बढ़ने में मदद करता है जो मानव और पशु अपशिष्ट जैसे जैविक पदार्थों को विघटित करते हैं। कुछ घंटों बाद, निलंबित सूक्ष्मजीव टैंक के नीचे सक्रिय कीचड़ के रूप में बैठ जाते हैं। पानी को फिर ऊपर से हटा दिया जाता है। सूखी हुई सक्रिय कीचड़ का उपयोग खाद के रूप में किया जाता है।
- क्लोरीनीकरण: निर्मलीकृत जल में पंप द्वारा वायु को गुजारा जाता है, जिससे उसमें वायवीय जीवाणुओं की वृद्धि होती है। ये जीवाणु निर्मलीकृत जल में अब भी बचे हुए मानव अपशिष्ट पदार्थों, खाद्य अपशिष्ट, साबुन और अन्य अवांछित पदार्थों का उपभोग कर लेते हैं।
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अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र
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