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महाराष्ट्र स्टेट बोर्डएसएससी (हिंदी माध्यम) ९ वीं कक्षा

अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा निश्चित करते समय किन बातों को ध्यान रखा गया है?

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प्रश्न

अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा निश्चित करते समय किन बातों को ध्यान रखा गया है?

संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

१८०° देशांतर रेखा को पार करने से समय क्षेत्र में परिवर्तन हो सकता है। इस प्रकार समय क्षेत्र में भ्रम से बचने के लिए कुछ सावधानियां बरतनी होंगी। इसलिए इसे शामिल करने के लिए तारीख और समय में बदलाव करना पड़ सकता है। इसे ग्रीनविच १८०° देशांतर रेखा मानकर बनाना होगा। ऐसा करते समय दो सावधानियां बरतनी होंगी -

  • यात्रा की दिशा - सूर्य पूर्व से पश्चिम की ओर तथा पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है। इस प्रकार पश्चिम के देशों में आधी रात १२:०० बजे दिन का अंत होता है और पूर्व के देशों में यह दिन की शुरुआत होती है। इस पर विचार करना होगा।
  • चालू वार तथा तिथि - जब हम देशांतर रेखा के पार यात्रा करते हैं, तो दिन और तारीख बदल जाती है। पूर्व से पश्चिम की ओर यात्रा करते समय यात्रा प्रारंभ करने वाले दिन में एक दिन और जुड़ना पड़ता है। लेकिन पश्चिम से पूर्व की ओर यात्रा करते समय आगमन पर वही दिन माना जाता है।
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अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा
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अध्याय 7: अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा - स्वाध्याय [पृष्ठ ६२]

APPEARS IN

बालभारती Bhugol [Hindi] Standard 9 Maharashtra State Board
अध्याय 7 अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा
स्वाध्याय | Q ४. (अ) | पृष्ठ ६२

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निम्नलिखित मार्ग से जाते समय अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा लाँघनी पड़ेगी। वह मानचित्र संग्रह के उपयोग से खोजिए तथा दिए गए मानचित्र में दर्शाइए।

मुंबई - लंदन - न्यूयॉर्क - लॉसएंजिलिस - टोकियो।


नीचे दी गई आकृति में अलग-अलग गोलार्थ में दो चौखटें दी गई हैं। दोनों चौखटों में से अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा जाती है। एक चौखट में देशांतर रेखा, वार और तिथि दी गई हैं, उसके अनुसार दूसरी चौखट के वार और तिथि पहचानिए।


निम्नलिखित मार्ग से जाते समय अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा लाँघनी पड़ेगी। वह मानचित्र संग्रह के उपयोग से खोजिए तथा दिए गए मानचित्र में दर्शाइए।

दिल्ली - लंदन - न्यूयॉर्क।


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