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ऐलुमिनियम के वैद्युत-धातुकर्म में ग्रैफाइट छड़ की क्या भूमिका है? - Chemistry (रसायन विज्ञान)

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प्रश्न

ऐलुमिनियम के वैद्युत-धातुकर्म में ग्रैफाइट छड़ की क्या भूमिका है?

संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

इस प्रक्रिया में ऐलुमिना, क्रायोलाईट तथा फ्लुओरस्पार (CaF2) के गलित मिश्रण का वैद्युतअपघटन ग्रैफाइट को ऐनोड के रूप में तथा ग्रैफाइट की परत चढ़े हुए आयरन को कैथोड के रूप में प्रयुक्त करके किया जाता है। वैद्युतअपघटन करने पर Al कैथोड पर मुक्त होती है, जबकि ऐनोड पर CO तथा CO2 मुक्त होती हैं।

कैथोड पर: \[\ce{Al^{3+} {(गलित)} -> Al_{(l)}}\]

ऐनोड पर: \[\ce{C_{(s)} + O^{2-} {(गलित)} -> CO_{(g)} + 2e^-}\]

\[\ce{C_{(s)} + 2O^{2-} {(गलित)} -> CO2_{(g)} + 4e^-}\]

यदि किसी अन्य धातु को ग्रेफाइट के स्थान पर प्रयुक्त किया जाता है, तब मुक्त O2 न केवल इलेक्ट्रोड की धातु को ऑक्सीकृत ही करेगी, बल्कि कैथोड पर मुक्त Al की कुछ मात्रा को पुनः Al2O3 में परिवर्तित कर देगी। चूँकि ग्रेफाइट अन्य किसी धातु से सस्ता होता है, इसलिए इसे ऐनोड के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। इस प्रकार ऐलुमिनियम के निष्कर्षण में ग्रेफाइट छड़ की भूमिका ऐनोड पर मुक्त O2 को संरक्षित करना है जिससे यह मुक्त होने वाले Al की कुछ मात्रा को पुन: Al2O3 में परिवर्तित न कर दे।

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धातुकर्म का वैद्युतरसायन सिद्धांत
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