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प्रश्न
निचे दिए गए विषय पर निबन्ध लिखिए जो लगभग 400 शब्दों से कम न हो:
आपके विद्यालयी जीवन का यह अन्तिम वर्ष है। आज आपका विदाई समारोह आयोजित किया गया है। इतने वर्षों का मित्रों एवं अध्यापकों का साथ छूटने वाला है। इन बीते वर्षों के न भूलने वाले खट्टे-मीठे अनुभव लिखिए।
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उत्तर
विद्यालय का विदाई समारोह
प्रस्तावना
समय की गति भी कितनी विचित्र होती है। कल तक जिस विद्यालय की दहलीज पर कदम रखते हुए मन में एक अनजाना डर और झिझक थी, आज उसी दहलीज को पार कर बाहर की दुनिया में कदम रखने का विचार आँखों में नमी भर देता है। आज मेरे विद्यालयी जीवन का अंतिम दिन है विदाई समारोह। यह वह दिन है, जहाँ स्मृतियों का एक विशाल सागर उमड़ रहा है और हृदय में मिश्रित भावनाओं का ज्वार है। इतने वर्षों का सफर, जो कभी खत्म न होने वाला लगता था, आज एक मोड़ पर आकर ठहर गया है।
अध्यापकों का स्नेह और मार्गदर्शन
विद्यालय केवल ईंट-पत्थरों की इमारत नहीं होती, बल्कि वह संस्कारों की पाठशाला होती है। यहाँ के अध्यापकों ने केवल किताबी ज्ञान ही नहीं दिया, बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाई। मुझे याद है वे दिन, जब गणित के कठिन सवालों पर सिर खुजलाते हुए अध्यापक का वह ढांढस बँधाना, “कोशिश करो, सब आसान हो जाएगा।” कभी-कभी उनकी डाँट कड़वी जरूर लगती थी, लेकिन आज समझ आता है कि वह डाँट हमारे चरित्र को गढ़ने के लिए थी। गुरुओं का वह निस्वार्थ प्रेम और अनुशासन ही है, जिसने हमें आज इस योग्य बनाया है कि हम भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सकें। उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए शब्द कम पड़ रहे हैं।
मित्रों का साथ और खट्टे-मीठे अनुभव
विद्यालयी जीवन की सबसे बड़ी पूँजी ‘मित्र’ होते हैं। मित्रों के साथ बिताए गए वे पल जीवन की सबसे अनमोल धरोहर हैं। कक्षा में पीछे बैठकर चुपके से टिफिन खाना, खेल के मैदान में जीत के लिए जी-जान लगा देना और परीक्षाओं के तनाव के बीच एक-दूसरे का मजाक उड़ाकर हँसाना ये सब अब केवल यादें बनकर रह जाएँगी। वह खट्टा अनुभव जब किसी शरारत के पकड़े जाने पर पूरी बेंच को सजा मिली थी, और वह मीठा अनुभव जब किसी प्रतियोगिता में जीत हासिल करने पर पूरे विद्यालय ने तालियों से हमारा स्वागत किया था। दोस्तों के साथ की गई वह छोटी-छोटी लड़ाइयाँ और पल भर में फिर से एक हो जाना, अब शायद कॉलेज की भीड़ में कहीं खो जाएगा।
विदाई समारोह का दृश्य
आज विद्यालय का कोना-कोना उन शरारतों और प्रार्थना सभा की गूँज की गवाही दे रहा है। रंग-बिरंगी रोशनी से सजे इस विदाई समारोह में सभी हँस रहे हैं, फोटो खिंचवा रहे हैं, लेकिन हर मुस्कान के पीछे एक उदासी छिपी है। जूनियर्स द्वारा दी गई प्रस्तुतियाँ और सीनियर्स के भाषण सब कुछ जैसे यह कह रहा है कि “अब जाने का समय आ गया है।” अपने प्रधानाचार्य के हाथों विदाई स्मृति चिन्ह लेते समय लगा जैसे मेरे बचपन का एक बहुत बड़ा अध्याय समाप्त हो रहा है।
