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NCERT solutions for Hindi - Sanchayan Part 2 Class 10 Cbse chapter 2 - सपनों के-से दिन [Latest edition]

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Hindi - Sanchayan Part 2 Class 10 Cbse - Shaalaa.com

Chapter 2: सपनों के-से दिन

बोध-प्रश्नअतिरिक्त प्रश्न
बोध-प्रश्न [Pages 30 - 31]

NCERT solutions for Hindi - Sanchayan Part 2 Class 10 Cbse Chapter 2 सपनों के-से दिन बोध-प्रश्न [Pages 30 - 31]

बोध-प्रश्न | Q 1 | Page 30

कोई भी भाषा आपसी व्यवहार में बाधा नहीं बनती−पाठ के किस अंश से यह सिद्ध होता हैं?

बोध-प्रश्न | Q 2 | Page 30

पीटी साहब की 'शाबाश' फ़ौज के तमगों-सी क्यों लगती थी। स्पष्ट कीजिए।

बोध-प्रश्न | Q 3 | Page 30

नयी श्रेणी में जाने और नयी कापियों और पुरानी किताबों से आती विशेष गंध से लेखक का बालमन क्यों उदास हो उठता था?

बोध-प्रश्न | Q 4 | Page 30

स्काउट परेड करते समय लेखक अपने को महत्वपूर्ण 'आदमी' फ़ौजी जवान क्यों समझने लगता था?

बोध-प्रश्न | Q 5 | Page 30

हेडमास्टर शर्मा जी ने पीटी साहब को क्यों मुअतल कर दिया?

बोध-प्रश्न | Q 6 | Page 30

लेखक के अनुसार उन्हें स्कूल खुशी से भागे जाने की जगह न लगने पर भी कब और क्यों उन्हें स्कूल जाना अच्छा लगने लगा?

बोध-प्रश्न | Q 7 | Page 30

लेखक अपने छात्र जीवन में स्कूल से छुट्टियों में मिले काम को पूरा करने के लिए क्या-क्या योजनाएँ बनाया करता था और उसे पूरा न कर पाने की स्थिति में किसकी भाँति 'बहादुर' बनने की कल्पना किया करता था?

बोध-प्रश्न | Q 8 | Page 30

पाठ में वर्णित घटनाओं के आधार पर पीटी सर की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

बोध-प्रश्न | Q 9 | Page 31

विद्यार्थियों को अनुशासन में रखने के लिए पाठ में अपनाई गई युक्तियों और वर्तमान में स्वीकृत मान्यताओं के संबंध में अपने विचार प्रकट कीजिए।

बोध-प्रश्न | Q 10 | Page 31

बचपन की यादें मन को गुदगुदाने वाली होती हैं विशेषकर स्कूली दिनों की। अपने अब तक के स्कूली जीवन की खट्टी-मीठी यादों को लिखिए ।

बोध-प्रश्न | Q 11.1 | Page 31

प्राय: अभिभावक बच्चों को खेल-कूद में ज़्यादा रूचि लेने पर रोकते हैं और समय बरबाद न करने की नसीहत देते हैं बताइए −

खेल आपके लिए क्यों ज़रूरी हैं?

बोध-प्रश्न | Q 11.2 | Page 31

प्राय: अभिभावक बच्चों को खेल-कूद में ज़्यादा रूचि लेने पर रोकते हैं और समय बरबाद न करने की नसीहत देते हैं बताइए −

आप कौन से ऐसे नियम-कायदों को अपनाएँगे जिससे अभिभावकों को आपके खेल पर आपत्ति न हो?

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अतिरिक्त प्रश्न

NCERT solutions for Hindi - Sanchayan Part 2 Class 10 Cbse Chapter 2 सपनों के-से दिन अतिरिक्त प्रश्न

अतिरिक्त प्रश्न | Q 1

‘बच्चों की यह स्वाभाविक विशेषता होती है कि खेल ही उन्हें सबसे अच्छा लगता है।’ सपनों के-से दिन नामक पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

अतिरिक्त प्रश्न | Q 2

लेखक के बचपन के समय बच्चे पढ़ाई में रुचि नहीं लेते थे।-स्पष्ट कीजिए।

अतिरिक्त प्रश्न | Q 3

लेखक के बचपन में बच्चों के न पढ़ पाने के लिए अभिभावक अधिक जिम्मेदार थे। इससे आप कितना सहमत हैं?

अतिरिक्त प्रश्न | Q 4

गरमी की छुट्टियों के पहले और आखिरी दिनों में लेखक ने क्या अंतर बताया है?

अतिरिक्त प्रश्न | Q 5

लेखक ने ‘सस्ता सौदा’ किसे कहा है? और क्यों?

अतिरिक्त प्रश्न | Q 6

लेखक ने सातवीं कक्षा तक की जो पढ़ाई की उसमें स्कूल के हेडमास्टर शर्मा जी का योगदान अधिक था। स्पष्ट कीजिए।
अथवा
लेखक की पढ़ाई में हेडमास्टर शर्मा जी का योगदान स्पष्ट कीजिए।

अतिरिक्त प्रश्न | Q 7

पीटी मास्टर प्रीतमचंद को देखकर बच्चे क्यों डरते थे?

अतिरिक्त प्रश्न | Q 8

लेखक और उसके साथी प्रीतमचंद की दी गई सज़ा वाला कौन-सा दिन आजीवन नहीं भूल सके?
अथवा
फ़ारसी की कक्षा में मास्टर प्रीतमचंद ने किस तरह शारीरिक दंड दिया जो बच्चों को आजीवन याद रहा?

अतिरिक्त प्रश्न | Q 9

हेडमास्टर ने प्रीतमचंद के विरुद्ध क्या कार्यवाही की?

अतिरिक्त प्रश्न | Q 10

प्रीतमचंद के निलंबन के बाद भी बच्चों के मन में उनका डर किस तरह समाया था?

अतिरिक्त प्रश्न | Q 11

लेखक ने अपने विद्यालय को हरा-भरा बनाने के लिए किए गए प्रयासों का वर्णन किया है। इससे आपको क्या प्रेरणा मिलती है?

अतिरिक्त प्रश्न | Q 12

लेखक और उसके साथियों द्वारा गरमी की छुट्टियाँ बिताने का ढंग आजकल के बच्चों द्वारा बिताई जाने वाली छुट्टियों से किस तरह अलग होता था?

अतिरिक्त प्रश्न | Q 13

मास्टर प्रीतमचंद को स्कूल से क्यों निलंबित कर दिया गया? निलंबन के औचित्य और उस घटना से उभरने वाले जीवन-मूल्यों पर विचार कीजिए।

अतिरिक्त प्रश्न | Q 14

‘सपनों के-से दिन’ पाठ में हेडमास्टर शर्मा जी की, बच्चों को मारने-पीटने वाले अध्यापकों के प्रति क्या धारणा थी? जीवन-मूल्यों के संदर्भ में उसके औचित्य पर अपने विचार लिखिए।

अतिरिक्त प्रश्न | Q 15

‘सपनों के-से दिन’ पाठ के आधार पर बताइए कि बच्चों का खेलकूद में अधिक रुचि लेना अभिभावकों को अप्रिय क्यों लगता था? पढ़ाई के साथ खेलों का छात्र जीवन में क्या महत्त्व है और इससे किन जीवन-मूल्यों की प्रेरणा मिलती है?

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Chapter 2: सपनों के-से दिन

बोध-प्रश्नअतिरिक्त प्रश्न
Hindi - Sanchayan Part 2 Class 10 Cbse - Shaalaa.com

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