Sociology (समाजशास्त्र) Arts (Hindi Medium) Class 12 [१२ वीं कक्षा] CBSE Syllabus 2024-25

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CBSE Class 12 [१२ वीं कक्षा] Sociology (समाजशास्त्र) Syllabus - Free PDF Download

CBSE Syllabus 2024-25 Class 12 [१२ वीं कक्षा]: The CBSE Class 12 [१२ वीं कक्षा] Sociology (समाजशास्त्र) Syllabus for the examination year 2024-25 has been released by the Central Board of Secondary Education, CBSE. The board will hold the final examination at the end of the year following the annual assessment scheme, which has led to the release of the syllabus. The 2024-25 CBSE Class 12 [१२ वीं कक्षा] Sociology (समाजशास्त्र) Board Exam will entirely be based on the most recent syllabus. Therefore, students must thoroughly understand the new CBSE syllabus to prepare for their annual exam properly.

The detailed CBSE Class 12 [१२ वीं कक्षा] Sociology (समाजशास्त्र) Syllabus for 2024-25 is below.

Academic year:

CBSE Class 12 [१२ वीं कक्षा] Sociology (समाजशास्त्र) Revised Syllabus

CBSE Class 12 [१२ वीं कक्षा] Sociology (समाजशास्त्र) and their Unit wise marks distribution

CBSE Class 12 [१२ वीं कक्षा] Sociology (समाजशास्त्र) Course Structure 2024-25 With Marking Scheme

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Syllabus

CBSE Class 12 [१२ वीं कक्षा] Sociology (समाजशास्त्र) Syllabus for Chapter 1: भारतीय समाज

1 भारतीय समाज : एक परिचय
  • भारतीय समाज - एक परिचय  
2 भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना
  • भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना  
  • जनसांख्यिकी संबंधी कुछ सिद्धांत एवं संकल्पनाएं  
    • माल्थस का जनसंख्या वृद्धि का सिद्धांत
    • जनसांख्यिकीय संक्रमण का सिद्धांत
    • सामान्य संकल्पनाएँ एवं संकेतक
  • भारत की जनसंख्या का आकार और संवृद्धि  
  • भारतीय जनसंख्या की आयु संरचना  
  • भारत में गिरता हुआ स्त्री-पुरुष अनुपात  
  • साक्षरता  
  • ग्रामीण-नगरीय विभिन्नताएँ  
  • भारत की जनसंख्या नीति  
3 सामाजिक संस्थाएँ : निरंतरता एवं परिवर्तन
  • सामाजिक संस्थाएँ - निरंतरता एवं परिवर्तन  
  • जाति एवं जाति व्यवस्था  
    • अतीत में जाति
    • उपनिवेशवाद और जाति
    • जाति का समकालीन रुप
  • जनजातीय समुदाय  
    • जनजातीय समाजों का वर्गीकरण
    1. स्थायी विशेषक
    2. अर्जित विशेषक
    • जनजाति - एक संकल्पना की जीवनी
    • मुख्यधारा के समुदायों का जनजातियों के प्रति रवैया
    • राष्ट्रीय विकास बनाम जनजातीय विकास
    • समकालीन जनजातीय पहचान
  • परिवार और नातेदारी  
    • मूल एवं विस्तारित परिवार
    • परिवार के विविध रूप
4 बाज़ार एक सामाजिक संस्था के रूप में
  • बाज़ार एक सामाजिक संस्था के रूप में  
  • बाजार और अर्थव्यवस्था का समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य  
    • छत्तीसगढ़ के जिला बस्तर में धोराई गाँव का एक साप्ताहिक 'आदिवासी बाजार'
    • पूर्व उपनिवेशिक और उपनिवेशिक भारत में जाति आधारित बाजार एवं व्यापारिक तंत्र
    • बाजारों का सामाजिक संगठन - 'पारंपरिक व्यापारिक समुदाय'
    • उपनिवेशवाद और नए बाजारों का आविर्भाव
  • पूँजीवाद को एक सामाजिक व्यवस्था के रूप में समझना  
    • वस्तुकरण या पण्यीकरण और उपभोग
  • भूमंडलीकरण - स्थानीय, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को गठजोड़  
    • अप्रत्यक्ष बाजार - समय और दूरी पर विजय?
    • उदारवादिता पर बहस - बाज़ार बनाम राज्य
5 सामाजिक विषमता एवं बहिष्कार के स्वरूप
  • सामाजिक विषमता एवं बहिष्कार के स्वरूप  
  • सामाजिक विषमता एवं बहिष्कार सामाजिक कैसे है?  
    • सामाजिक विषमता
    • सामाजिक अपवर्जन या बहिष्कार
  • जाति और जनजाति - दो व्यवस्थाएं जो विषमता को कायम रखती है एवं न्यायसंगत सिद्ध करती है  
    • जाति - एक भेदभावपूर्ण व्यवस्था
    • अस्पृश्यता
    • जातियों और जनजातियों के प्रति भेदभाव मिटाने के लिए राज्य और अन्य संगठनों द्वारा उठाए गए कदम
    • अन्य पिछड़े वर्ग
    • आदिवासी संघर्ष
  • स्त्रियों की समानता और अधिकारों के लिए संघर्ष  
  • विकलांगों का संघर्ष  
6 सांस्कृतिक विविधता की चुनौतियाँ
  • सांस्कृतिक विविधता की चुनौतियाँ  
  • सांस्कृतिक समुदाय एवं राष्ट्र-राज्य  
    • सामुदायिक पहचान का महत्व
    • समुदाय, राष्ट्र एवं राष्ट्र-राज्य
    • सांस्कृतिक विविधता एवं भारतीय राष्ट्र-राज्य - एक विहंगम दृष्टि
  • भारतीय संदर्भ में क्षेत्रवाद  
  • राष्ट्र-राज्य एवं धर्म से संबंधित मुद्दे और पहचानें  
    • अल्पसंख्यको के अधिकार और राष्ट्र-निर्माण
    • सांप्रदायिकता, धर्मनिरपेक्षता एवं
      राष्ट्र-राज्य
  • राज्य और नागरिक समाज  
7 परियोजना कार्य के लिए सुझाव
  • शोध पद्धतियों की बहुलता  
    • सर्वेक्षण प्रणाली
    • साक्षात्कार
    • प्रेक्षण
    • एक से अधिक पद्धतियों का सम्मिश्रण
  • छोटी शोध परियोजनाओं के लिए संभावित प्रकरण एवं विषय  
    1. सार्वजनिक परिवहन
    2. सामाजिक जीवन में संचार माध्यमों की भूमिका
    3. घर-परिवार में काम आने वाले उपकरण एवं घरेलू कार्य
    4. सार्वजनिक स्थान का उपयोग
    5. विभिन्न आयु वर्गों की बदलती हुई आकांक्षाएँ
    6. एक वस्तु की जीवनी

CBSE Class 12 [१२ वीं कक्षा] Sociology (समाजशास्त्र) Syllabus for Chapter 2: समाजशास्त्र - भारत में सामाजिक परिवर्तन एवं विकास

1 संरचनात्मक परिवर्तन
  • संरचनात्मक परिवर्तन  
  • उपनिवेशवाद की समझ  
  • नगरीकरण और औद्योगीकरण  
    • औपनिवेशिक अनुभव
    • चाय की बागवानी
    • स्वतंत्र भारत में औद्योगीकरण
    • स्वतंत्र भारत में नगरीकरण
2 सांस्कृतिक परिवर्तन
  • सांस्कृतिक परिवर्तन  
  • उन्नीसवीं और बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में हुए समाज सुधार आंदोलन  
  • हम संस्कृतीकरण, आधुनिकीकरण, पंथनिरपेक्षीकरण और पश्चिमीकरण को किस प्रकार समझेंगे  
  • सामाजिक परिवर्तन के विभिन्न प्रकार  
    • संस्कृतीकरण
    • पश्चिमीकरण
    • आधुनिकीकरण और पंथनिरपेक्षीकरण
3 भारतीय लोकतंत्र की कहानियाँ
  • भारतीय लोकतंत्र की कहानियाँ  
  • भारतीय संविधान  
    • भारतीय लोकतंत्र के केंद्रीय मूल्य
    • संविधान-सभा का वाद-विवाद : एक इतिहास
    • हित प्रतिस्पर्धी : संविधान और सामाजिक परिवर्तन
    • संवैधानिक मानदंड और सामाजिक न्याय : सामाजिक न्याय सशक्तता की व्याख्या
  • पंचायती राज और ग्रामीण सामाजिक रूपांतरण की चुनौतियाँ  
    • पंचायती राज के आदर्श
    • पंचायतों की शक्तियाँ और उत्तरदायित्व
    • जनजाति क्षेत्रों में पंचायती राज
    • लोकतंत्रीकरण और असमानता
  • राजनीतिक दल, दबाव समूह और लोकतांत्रिक राजनीति  
4 ग्रामीण समाज में विकास एवं परिवर्तन
  • ग्रामीण समाज में विकास एवं परिवर्तन  
  • कृषिक संरचना: ग्रामीण भारत में जाति एवं वर्ग  
  • भूमि सुधार के परिणाम  
    • औपनिवेशिक काल
    • स्वतंत्र भारत
  • हरितक्रांति और उसके सामाजिक परिणाम  
  • स्वतंत्रता के बाद ग्रामीण समाज में परिवर्तन  
  • मजदूरों का संचार (सरकुलेशन)  
  • भूमंडलीकरण, उदारीकरण तथा ग्रामीण समाज  
5 औद्योगिक समाज में परिवर्तन और विकास
  • औद्योगिक समाज में परिवर्तन और विकास  
  • औद्योगिक समाज की कल्पना  
  • भारत में औद्योगीकरण  
    • भारतीय औद्योगीकरण की विशिष्टताएँ
    • भारत में स्वतंत्रता के प्रारंभिक वर्षों में औद्योगीकरण
    • भूमंडलीकरण, उदारीकरण एवं भारतीय उद्योगों में परिवर्तन
  • लोग काम किस तरह पाते हैं  
  • काम को किस तरह किया जाता है?  
  • कार्यावस्थाएँ  
  • घरों में होने वाला काम  
  • हड़तालें एवं मजदूर संघ  
6 भूमंडलीकरण और सामाजिक परिवर्तन
  • भूमंडलीकरण और सामाजिक परिवर्तन  
  • क्या भूमंडलीकरण के अंत:संबंध विश्व और भारत के लिए नए हैं?  
    • प्रारंभिक वर्ष
    • उपनिवेशवाद और भूमंडलीय संयोजन
    • स्वतंत्र भारत और विश्व
  • भूमंडलीकरण की समझ  
    • भूमंडलीकरण के विभिन्न आयाम
    • भूमंडलीय संचार
    • भूमंडलीकरण और श्रम
    • भूमंडलीकरण और रोजगार
    • भूमंडलीकरण और राजनीतिक परिवर्तन
    • भूमंडलीकरण और संस्कृति
    • जेंडर और संस्कृति
    • उपभोग की संस्कृति
    • निगम संस्कृति
7 जनसंपर्क साधन और जनसंचार
  • जनसंपर्क साधन और जनसंचार  
  • आधुनिक मास मीडिया का प्रारंभ  
  • स्वतंत्र भारत में मास मीडिया  
    • दृष्टिकोण
    • रेडियो
    • टेलीविज़न
    • मुद्रण माध्यम (प्रिंट मीडिया)
  • भूमंडलीकरण और मीडिया  
    • मुद्रण माध्यम (प्रिंट मीडिया)
    • टेलीविज़न
    • रेडियो
8 सामाजिक आंदोलन
  • सामाजिक आंदोलन  
  • सामाजिक आंदोलन के लक्षण  
    • सामाजिक परिवर्तन तथा सामाजिक आंदोलन में अंतर
  • समाजशास्त्र तथा सामाजिक आंदोलन  
    • सामाजिक आंदोलनों का अध्ययन समाजशास्त्र के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
    • सामाजिक आंदोलनों के सिद्धांत
  • सामाजिक आंदोलनों के प्रकार  
    • वर्गीकरण का एक प्रकार - सुधारवादी, प्रतिदानात्मक, क्रांतिकारी
    • वर्गीकरण का एक अन्य प्रकार - पुराना तथा नया
  • पारिस्थितिकीय आंदोलन  
  • वर्ग आधारित आंदोलन  
    • किसान आंदोलन
    • कामगारों का आंदोलन
  • जाति-आधारित आंदोलन  
    • दलित आंदोलन
    • पिछड़े वर्ग एवं जातियों के आंदोलन
    • उच्च जाति का जवाब
  • जनजातीय आंदोलन  
    • झारखंड
    • पूर्वोत्तर
  • महिलाओं का आंदोलन  
    • 19वीं सदी के सामाज-सुधार आंदोलन तथा प्रारंभिक महिला संगठन
    • कृषिक संघर्ष तथा क्रांतियाँ
    • 1947 के बाद
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