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Business Studies (व्यवसाय अध्ययन) Class 12 [१२ वीं कक्षा] CBSE (Commerce) (Hindi Medium) CBSE Topics and Syllabus

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CBSE Syllabus For Class 12 [१२ वीं कक्षा] Business Studies (व्यवसाय अध्ययन): Knowing the Syllabus is very important for the students of Class 12 [१२ वीं कक्षा]. Shaalaa has also provided a list of topics that every student needs to understand.

The CBSE Class 12 [१२ वीं कक्षा] Business Studies (व्यवसाय अध्ययन) syllabus for the academic year 2022-2023 is based on the Board's guidelines. Students should read the Class 12 [१२ वीं कक्षा] Business Studies (व्यवसाय अध्ययन) Syllabus to learn about the subject's subjects and subtopics.

Students will discover the unit names, chapters under each unit, and subtopics under each chapter in the CBSE Class 12 [१२ वीं कक्षा] Business Studies (व्यवसाय अध्ययन) Syllabus pdf 2022-2023. They will also receive a complete practical syllabus for Class 12 [१२ वीं कक्षा] Business Studies (व्यवसाय अध्ययन) in addition to this.

Academic year:

CBSE Class 12 [१२ वीं कक्षा] Business Studies (व्यवसाय अध्ययन) Revised Syllabus

CBSE Class 12 [१२ वीं कक्षा] Business Studies (व्यवसाय अध्ययन) and their Unit wise marks distribution

CBSE Class 12 [१२ वीं कक्षा] Business Studies (व्यवसाय अध्ययन) Course Structure 2022-2023 With Marking Scheme

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Syllabus

CBSE Class 12 [१२ वीं कक्षा] Business Studies (व्यवसाय अध्ययन) Syllabus for प्रबंध के सिद्धांत और कार्य

1 प्रबंध की प्रकृति एवं महत्त्व
2 प्रबंध के सिद्धांत
3 व्यवसायिक पर्यावरण
4 नियोजन
  • नियोजन 
    • नियोजन का परिचय
    • अर्थ
  • नियोजन का महत्त्व 
    • नियोजन निर्देशन की व्यवस्था करता है 
    • नियोजन अनेश्चितता की जोखिम को कम करता है 
    • नियोजन, नव-प्रवर्तन विचारों को प्रोत्साहित करता है 
    • नियोजन निर्णम लेने को सरल करता है 
    • नियोजन नियंत्रण के मनकों का निर्धारण करता है 
  • नियोजन की विशेषताएँ 
    • नियोजन का केंद्र बिंदु लक्ष्य प्राप्ति होती है
    • नियोजन प्रबंधन का प्राथमिक कार्य
    • नियोजन सर्वव्यापी है
    • नियोजन अविरत है
    • नियोजन भविष्यवादी है
    • नियोजन में निर्णय रचना निहित है
    • नियोजन एक मानसिक अभ्यास है
  • नियोजन की सीमाएँ 
    • नियोजन दृढ़ता उत्पन्न करता है
    • परिवर्तनशील वातावरण में नियोजन प्रभावी नहीं रहता
    • नियोजन रचनात्मकता को कम करता है
    • नियोजन में भारी लागत आती है
    • नियोजन समय नष्ट करने वाली प्रक्रिया है
    • नियोजन सफलता का आश्वासन नहीं है
  • नियोजन प्रक्रिया 
    • उद्देश्यों का निर्धारण
    • विकसशील आधार
    • कार्यवाही की वैकल्पिक विधियों की पहचान
    • विकल्पों का मूल्यांकन
    • विकल्पों का चुनाव
    • योजना को लागू करना
    • अनुवर्तन
  • नियोजन के प्रकार 
  • योजनाओं के प्रकार 
    • एकल प्रयोग तथा स्थायी योजनाएँ
    • एकल प्रयोग योजना.
    • स्थायी योजना
  • उद्देश्य 
  • व्यूह-रचना 
  • नीति 
  • पक्रिया 
  • विधि 
  • नियम 
  • कार्यक्रम 
  • बजट 
5 संगठन
6 नियुक्तिकरण
7 निर्देशन
8 नियंत्रण

CBSE Class 12 [१२ वीं कक्षा] Business Studies (व्यवसाय अध्ययन) Syllabus for व्यवसाय, वित्त एवं विपणन

1 व्यवसायिक वित्त
  • व्यवसायिक वित्त 
    • व्यवसायिक वित्त का परिचय
    • अर्थ
  • वित्तीय प्रबंध 
    • भूमिका
  • उद्देश्य 
  • वित्तीय निर्णय 
    • निवेश संबंधी निर्णय
    • पूँजी बजटिंग निर्णयों को प्रभावित करने वाले कारक
    • वित्तीयन संबंधी निर्णय
    • वित्तीय निर्णय को प्रभावित करने वाले कारक
    • लाभांश से संबंधित निर्णय
    • लाभांश निर्णय को प्रभावित करने वाले कारक
  • वित्तीय नियोजन 
  • वित्तीय नियोजन का महत्त्व 
  • पूँजी संरचना 
    • पूँजी संरचना को प्रभावित करने वाले कारक
    1. रोकड़ प्रवाह स्थिति
    2. ब्याज आवरण अनुपात (आई. ओ.आर)
    3. ऋण सेवा आवरण अनुपात (डी. एस. सी. आर)
    4. निवेश पर आय ( आर. ओ. आई)
    5. ऋण की लागत
    6. कर दर
    7. समता की लागत
    8. प्रवर्तन लागत
    9. जोखिम का ध्यान
    10. लचीलापन
    11. नियंत्रण
    12. नियामक ढांचा
    13. शेयर बाज़ार की दशाएँ
    14. अन्य कंपनियों की पूँजी संरचना
  • स्थाई एवं कार्यशील पूँजी 
    • अर्थ
    • स्थाई पूँजी का प्रबंधन
    • स्थाई पूँजी की आवश्यकता को प्रभावित करने वाले घटक
    1. व्यवसाय की प्रकृति
    2. संक्रिया का मापदंड
    3. तकनीक का विकल्प
    4. तकनीकी उत्थान
    5. विकास प्रत्याशा
    6. विविधीकरण
    7. वित्तीय विकल्प
    8. सहयोग का स्तर
  • कार्यशील पूँजी 
  • कार्यशील पूँजी आवश्यकता को प्रभावित करने वाले कारक 
    • व्यवसाय की प्रकृति
    • संचालन का स्तर
    • व्यवसाय चक्र
    • मौसमी कारक
    • उत्पादन चक्र
    • उधार क्रय सुविधा
    • संचालन कार्य कुशलता
    • कच्चे माल की उपलब्धि
    • विकास प्रत्याशा
    • प्रतियोगिता का स्तर
    • मुद्रा स्फीति
2 वित्तीय बाज़ार
3 विपणन
  • विपणन का अर्थ 
  • विपणन की विशेषताएँ 
    • अपेक्षा एवं आवश्यकता
    • उत्पाद का सृजन
    • ग्राहक के योग्य मूल्य
    • विनिमय पद्धति
  • विपणन प्रबंध 
    • विपणन प्रबंध दर्शन
    • उत्पादन की अवधारणा
    • उत्पाद की अवधारणा
    • बिक्री की अवधारणा
    • विपणन की अवधारणा
  • विपणन के कार्य 
    • बाज़ार संबंधी सूचना एकत्रित करना तथा उसका विश्लेषण करना
    • विपणन नियोजन
    • उत्पाद का रूपांकन एवं विकास
    • प्रमाणीकरण (मानकीकरण) एवं ग्रेड तय करना
    • पैकेजिंग एवं लेबलिंग
    • ब्रांडिंग
    • ग्राहक समर्थन सेवाएँ
    • उत्पाद का मूल्य निर्धारण
    • संवर्धन
    • वितरण
    • परिवहन
    • संग्रहण अथवा भंडारण
  • उत्पाद 
  • उत्पादों का वर्गीकरण 
  • उपभोक्ता वस्तुएँ 
    • उपभोक्ता वस्तुएँ के प्रकार हैं
    1. सुविधा उत्पाद
    2. क्रय योग्य वस्तुएँ 
    3. विशिष्ट उत्पाद
    • उत्पादों का टिकाऊपन
    1. गैर-टिकाऊ उत्पाद
    2. टिकाऊ उत्पाद
    3. सेवाएँ
  • औद्योगिक उत्पाद 
    • वर्गीकरण
  • ब्रांडिंग 
    • ब्रांड
    • ब्रांड नाम
    • ब्रांड चिह्न
    • ट्रेड मार्क
    • एक अच्छे ब्रांड नाम की विशेषताएँ
  • पैकेजिंग 
    • पैकेजिंग के स्तर
    1. प्राथमिक पैकेज
    2. व्दितीयक पैकेजिंग
    3. परिवहन के लिए  पैकेजिंग
    • पैकेजिंग का महत्त्व
    • पैकेजिंग के कार्य
    • लेबालिंग
    1. उत्पाद का विवरण एवं विषय वस्तु
    2. उत्पाद अथवा ब्रांड की पहचान करना
    3. उत्पादों का श्रेणीकरण
    4. उत्पाद के प्रवर्तन में सहायता लेबल का एक और महत्वपूर्ण कार्य है
    5. कानून सम्मत जानकारी देना
  • मूल्य निर्धारण 
    • मूल्य/ कीमत निर्धारण के निर्धारक तत्व
    1. वस्तु की लगत
    2. उपयोगिता एवं माँग
    3. बाज़ार में प्रतियोगिता की सीमा
    4. सरकार एवं कानूनी नियम
    5. मूल्य निर्धारण का उद्देश्य
    6. विपणन की पद्धतियाँ
  • भौतिक वितरण 
    • भौतिक वितरण के घटक
    1. आदेश का प्रक्रियण
    2. परिवहन
    3. भंडारण
    4. संगृहित माल पर नियंत्रण
  • प्रवर्तन 
  • प्रवर्तन मिश्र 
  • विज्ञापन 
    • विज्ञापन के लाभ
  • विज्ञापन की आलोचना 
    • लागत में वृद्धि
    • सामाजिक मूल्यों में कमी
    • क्रेताओं में असमंजस
    • घटिया उत्पादों की बिक्री को प्रोत्साहन
  • वैयक्तिक विक्रय 
    • वैयक्तिक विक्रय की विशेषताएँ
    • वैयक्तिक विक्रय के लाभ
  • वैयक्तिक विक्रय की भूमिका 
    • व्यवसायी को लाभ
    • ग्राहकों के लिए महत्त्व
    • समाज के लिए महत्त्व
  • विक्रय संवर्धन 
    • विक्रय संवर्धन के लाभ
    • विक्रय संवर्धन की सीमाएँ
    • विक्रय संवर्धन की सामान्य रूप से प्रयोग में आने वाली क्रियाएँ
    1. छूट
    2. कटौती
    3. वापसी
    4. उत्पादों का मिश्रण
    5. अतिरिक्त मात्रा उपहार स्वरूप
    6. तुरंत ड्रा एवं घोषित उपहार
    7. लक्की ड्रा/ किस्मत आजमाएँ
    8. उपयोग योग्य लाभ
    9. शून्य प्रतिशत पर पुरा वित्तीयन
    10. नमूनों का वितरण
    11. प्रतियोगिता
  • प्रचार 
  • जनसंपर्क 
    • जनसंपर्क की भूमिका
    1. प्रैस संपर्क
    2. उत्पाद प्रचार
    3. निगमित सम्प्रेषण
    4. लॉबी प्रचार
    5. परामर्श
4 उपभोक्ता संरक्षण
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