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टोपी पहनकर गवरइया राजा को दिखाने क्यों पहुँची जबकि उसकी बहस गवरा से हुई और वह गवरा के मुँह से अपनी बड़ाई सुन चुकी थी। लेकिन राजा से उसकी कोई बहस हुई ही नहीं थी। फिर भी वह राजा को चुनौती देने को - Hindi (हिंदी)

Short Note

टोपी पहनकर गवरइया राजा को दिखाने क्यों पहुँची जबकि उसकी बहस गवरा से हुई और वह गवरा के मुँह से अपनी बड़ाई सुन चुकी थी। लेकिन राजा से उसकी कोई बहस हुई ही नहीं थी। फिर भी वह राजा को चुनौती देने को पहुँची। कारण का अनुमान लगाइए।

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Solution

अपनी सुंदर सी टोपी पहन गवरइया ने गवरे को दिखाया। गवरे ने उसकी प्रशंसा की किंतु गवरइया टोपी दिखाने राजा के पास गई वह राजा को यह अहसास करवाना चाहती थी कि राजा ! तू प्रजा को बिना पारिश्रमिक दिए काम करवाता है। प्रजा को राजा के अलावा किसी का सहारा नहीं होता। यदि इन्हें उचित पारिश्रमिक न मिला तो ये लोग भूखों मर जाएँगे। गवरइया राजा की कार्यप्रणाली को भली प्रकार समझ चुकी थी। उसने धुनिए, कोरी एवं दर्जी को काम करते हुए यह सब प्रत्यक्ष देख लिया था कि वे राजा के काम को स्वेच्छा से नहीं बल्कि डर से कर रहे हैं, जबकि पारिश्रमिक पाने पर यही काम अच्छी तरह से करते हैं। इसके अलावा पारिश्रमिक देने पर काम जल्दी भी होता है। गवरइया राजा को यही सब एहसास करवाने एवं चुनौती देने गई थी।

Concept: गद्य (Prose) (Class 8)
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APPEARS IN

NCERT Hindi - Vasant Part 3 Class 8 CBSE
Chapter 18 टोपी
अनुमान और कल्पना | Q 1 | Page 128
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