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Answer in Brief
निम्नलिखित अवतरण को पढ़कर इसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
कांग्रेस के संगठनकर्ता पटेल कांग्रेस को दूसरे राजनितिक समूह से निसंग रखकर उसे एक सर्वांगसम तथा अनुशासित राजनितिक पार्टी बनाना चाहते थे। वे चाहते थे की कांग्रेस सबको समेटकर चलने वाला स्वभाव छोड़े और अनुशासित कॉडर से युक्त एक सगुंफित पार्टी के रूप में उभरें। 'यथार्थवादी' होने के कारण पटेल व्यापकता की जगह अनुशासन को ज़्यादा तरजीह देते थे। अगर "आंदोलन को चलाते चले जाने" के बारे में गाँधी के ख्याल हद से ज़्यादा रोमानी थे तो कांग्रेस को किसी एक विचारधारा पर चलने वाली अनुशासित तथा धुरंधर राजनितिक पार्टी के रूप में बदलने की पटेल की धारना भी उसी तरह कांग्रेस की उस समन्वयवादी भूमिका को पकड़ पाने में चूक गई जिसे कांग्रेस को आने वाले दशकों में निभाना था।
- रजनी कोठरी
- लेखक क्यों सोच रहा है की कांग्रेस को एक सर्वांगसम तथा अनुशासित पार्टी नहीं होना चाहिए?
- शुरूआती सालों में कॉंग्रेस द्वारा निभाई समन्वयवादी भूमिका के कुछ उदाहरण दीजिए।
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Solution
- लेखक (रजनी कोठरी) यह विचार है कि कांग्रेस को एक सर्वांगसम अनुशासित पार्टी नहीं होना चाहिए क्योंकि कांग्रेस सबको समेटकर चलने वाला स्वभाव छोड़े और अनुशासित कॉडर से युक्त एक सगुंफित पार्टी के रूप में उभरें। 'यथार्थवादी' होने के कारण पटेल व्यापकता की जगह अनुशासन को ज़्यादा तरजीह देते थे। अगर "आंदोलन को चलाते चले जाने" के बारे में गाँधी के ख्याल हद से ज़्यादा रोमानी थे तो कांग्रेस को किसी एक विचारधारा पर चलने वाली अनुशासित तथा धुरंधर राजनितिक पार्टी के रूप में बदलने की पटेल की धारना भी उसी तरह कांग्रेस की उस समन्वयवादी भूमिका को पकड़ पाने में चूक गई जिसे कांग्रेस को आने वाले दशकों में निभाना था।
- कांग्रेस पार्टी का स्थापना 1885 में ग्वालियर टैंक बॉम्बे में हुआ अनेकों आरंभिक वर्षों में पार्टी ने कई विषयों में महत्वपूर्ण समन्वसपूर्ण कार्य भूमिका निभाई इस पार्टी में ब्रिटिश सरकार तथा देश के नागरिकों के बीच एक महत्वपूर्ण समय समन्वसपूर्ण के रूप में कार्य किया।
Concept: कांग्रेस के प्रभुत्व की प्रकृति
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