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लेखक चलते-पुरज़े लोगों को यथार्थ दोष क्यों मानता है? - Hindi Course - B

Short Note

लेखक चलते-पुरज़े लोगों को यथार्थ दोष क्यों मानता है?

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Solution

कुछ चालाक पढ़े-लिखे और चलते पुरज़े लोग, अनपढ़-गॅवार साधारण लोगों के मन में कट्टर बातें भरकर उन्हें धर्माध बनाते हैं। ये लोग धर्म विरुद्ध कोई बात सुनते ही भड़क उठते हैं, और मरने-मारने को तैयार हो जाते हैं। ये लोग धर्म के विषय में कुछ नहीं जानते यहाँ तक कि धर्म क्या है, यह भी नहीं जानते हैं। सदियों से चली आ रही घिसी-पिटी बातों को धर्म मानकर धार्मिक होने का दम भरते हैं और धर्मक्षीण रक्षा के लिए जान देने को तैयार रहते हैं। चालाक लोग उनके साहस और शक्ति का उपयोग अपना स्वार्थ पूरा करने के लिए करते हैं। उनके इस दुराचार के लिए लेखक चलते-पुरजे लोगों का यथार्थ दोष मानता है।

Concept: गद्य (Prose) (Class 9 B)
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APPEARS IN

NCERT Hindi - Sparsh Part 1 Class 9 CBSE
Chapter 5 गणेशशंकर विद्यार्थी - धर्म की आड़
अतिरिक्त प्रश्न | Q 11
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