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सरल अर्थ लिखिए:
मन की ______ बरसीं आँखें।
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निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए
| हर किसी को आत्मरक्षा करनी होगी, हर किसी को अपना कर्तव्य करना होगा । मैं किसी की सहायता की प्रत्याशा नहीं करता। मैं किसी का भी प्रत्याह नहीं करता । इस दुनिया से मदद की प्रार्थना करने का मुझे कोई अधकिार नहीं है । अतीत में जनि लोगों ने मेरी मदद की है या भविष्य में भी जो लोग मेरी मदद करेंगे, मेरे प्रति उन सबकी करुणा मौजूद है, इसका दावा कभी नहीं किया जा सकता। इसीलिए मैं सभी लोगों के प्रति चरि कृतज्ञ हूँ । तुम्हारी परिस्तिति इतनी बुरी देखकर मैं बेहद चिंतति हूँ । लेकनि यह जान लो कि-‘तुमसे भी ज्यादा दुखी लोग इस संसार में हैं । मैं तुमसे भी ज्यादा बुरी परसि्थतिि में हूँ । इंग्लैंड में सब कुछ के लिए मुझे अपनी ही जेब से खर्च करना पड़ता है । आमदनी कुछ भी नहीं है । लंदन में एक कमरे का किराया हर सप्ताह के लिए तीन पाउंड होता है । ऊपर से अन्य कई खर्च हैं । अपनी तकलीफों के लिए मैं किससे शकिायत करूँ ? यह मेरा अपना कर्मफल है, मुझे ही भुगतना होगा ।’ |
(१) कृति पूर्ण कीजिए :
१.

२.

(२) उत्तर लिखिए :
१. परिच्छेद में उल्लिखित देश - ______
२. हर किसी को करना होगा - ______
३. लेखक की तकलीफें - ______
4. हर किसी को करनी होगी - ______
(३) निर्देशानुसार हल कीजिए :
(अ) निम्नलिखित अर्थ से मेल खाने वाला शब्द उपर्युक्त परिच्छेद से ढूँढ़कर लिखिए :
१. स्वयं की रक्षा करना - ______
२. दूसरों के उपकारों को मानने वाला - ______
(ब) लिंग पहचानकर लिखिए :
१. जेब - ______
२. दावा - ______
३. साहित्य - ______
4. सेवा - ______
(४) ‘कृतज्ञता’ के संबंध में अपने विचार लिखिए ।
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वाक्यों का उचित क्रम लगाकर लिखिए :
- सातों तारे मंद पड़ गए।
- ये मेरी ओर से हैं।सब चीजें हैं दीदी।
- लोग उसको बेकार ही नहीं, ‘बेगार’ समझते हैं।
- मानू दीदी काकी की सबसे छोटी बेटी है।
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‘कला और कलाकार का सम्मान करना हमारा दायित्व है’, इस कथन पर अपने विचारों काे शब्दबद्ध कीजिए।
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निम्न अर्थ को स्पष्ट करने वाली पंक्तियाँ लिखिए :
संतों की सहनशीलता
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निम्न अर्थ को स्पष्ट करने वाली पंक्तियाँ लिखिए :
कपूत के कारण कुल की हान
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तालिका पूर्ण कीजिए :
| इन्हें | यह कहा है |
| (१) ______ | बटु समुदाय |
| (२) सज्जनों के सद्गुण | ______ |
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जोड़ियाँ मिलाइए:
| ‘अ’ समूह | उत्तर | ‘ब’ समूह | ||
| १. | दमकती बिजली | अ | दुष्ट की मित्रता | |
| २. | नव पल्लव से भरा वृक्ष | ब | साधक के मन का विवेक | |
| ३. | उपकारी की संपत्ति | क | ससि संपन्न पृथ्वी | |
| ४. | भूमि की | ड | माया से लिपटा जीव |
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इनके लिए पद्यांश में प्रयुक्त शब्द :

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बरषहिं जलद पाठ से प्रस्तुत पद्यांश से अपनी पसंद की किन्हीं चार पंक्तियों का सरल अर्थ लिखिए।
कबहुँ प्रबल बह मारुत, जहँ-तहँ मेघ बिलाहिं ।
जिमि कपूत के उपजे, कुल सद्धर्म नसाहिं ।।
कबहुँ दिवस महँ निबिड़ तम, कबहुँक प्रगट पतंग ।
बिनसइ-उपजइ ग्यान जिमि, पाइ कुसंग-सुसंग ।।
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संजाल पूर्ण कीजिए :

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उत्तर लिखिए :

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कृति पूर्ण कीजिए :

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उत्तर लिखिए :
व्यापारी और उद्योगपतियों के लिए अर्थशास्त्र द्वारा बनाए गए नये नियम - ______
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उत्तर लिखिए :
संपत्ति के दो मुख्य साधन
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