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English Medium इयत्ता १० - CBSE Question Bank Solutions for Hindi Course - A

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Hindi Course - A
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कविता का शीर्षक उत्साह क्यों रखा गया है?

[4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
Chapter: [4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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कविता में बादल किन-किन अर्थों की ओर संकेत करता है?

[4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
Chapter: [4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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शब्दों का ऐसा प्रयोग जिससे कविता के किसी खास भाव या दृश्य में ध्वन्यात्मक प्रभाव पैदा हो, नाद-सौंदर्य कहलाता है। उत्साह कविता में ऐसे कौन-से शब्द हैं जिनमें नाद-सौंदर्य मौजूद है, छाँटकर लिखें।

[4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
Chapter: [4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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जैसे बादल उमड़-घुमड़कर बारिश करते हैं वैसे ही कवि के अंतर्मन में भी भावों के बादल उमड़-घुमड़कर कविता के रूप में अभिव्यक्त होते हैं। ऐसे ही किसी प्राकृतिक सौंदर्य को देखकर अपने उमड़ते भावों को कविता में उतारिए।

[4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
Chapter: [4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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कवि ने क्रांति लाने के लिए किसका आह्वान किया है और क्यों?

[4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
Chapter: [4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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कवि युवा कवियों से क्या आवान करता है?

[4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
Chapter: [4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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कवि ने ‘नवजीवन’ का प्रयोग बादलों के लिए भी किया है। स्पष्ट कीजिए।

[4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
Chapter: [4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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बादल आने से पूर्व प्राणियों की मनोदशा का चित्रण कीजिए।

[4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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कवि निराला बादलों में क्या-क्या संभावनाएँ देखते हैं?

[4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
Chapter: [4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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कवि ने बादलों के किन-किन विशेषणों का प्रयोग किया है, स्पष्ट कीजिए।

[4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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‘उत्साह’ कविता का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।

[4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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कवि के अनुसार फसल क्या है?

[5] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
Chapter: [5] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
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कविता में फसल उपजाने के लिए आवश्यक तत्वों की बात कही गई है। वे आवश्यक तत्व कौन-कौन से हैं?

[5] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
Chapter: [5] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
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फसल को ‘हाथों के स्पर्श की गरिमा’ और ‘महिमा’ कहकर कवि क्या व्यक्त करना चाहता है?

[5] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
Chapter: [5] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
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भाव स्पष्ट कीजिए -

रूपांतर है सूरज की किरणों का
सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का!

[5] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
Chapter: [5] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
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कवि ने फसल को हज़ार-हज़ार खेतों की मिट्टी का गुण-धर्म कहा है -

(क) मिट्टी के गुण-धर्म को आप किस तरह परिभाषित करेंगे?

(ख) वर्तमान जीवन शैली मिट्टी के गुण-धर्म को किस-किस तरह प्रभावित करती है?

(ग) मिट्टी द्वारा अपना गुण-धर्म छोड़ने की स्थिति में क्या किसी भी प्रकार के जीवन की कल्पना की जा सकती है?

(घ) मिट्टी के गुण-धर्म को पोषित करने में हमारी क्या भूमिका हो सकती है?

[5] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
Chapter: [5] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
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‘फ़सल’ कविता हमें उपभोक्तावादी संस्कृति के दौर से कृषि संस्कृति की ओर ले जाती है। स्पष्ट कीजिए।

[5] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
Chapter: [5] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
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फ़सल उगाने में किसानों के योगदान को स्पष्ट कीजिए।

[5] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
Chapter: [5] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
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‘फ़सल’ कविता का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।

[5] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
Chapter: [5] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
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कवि ने कठिन यथार्थ के पूजन की बात क्यों कही है?

[1.07] गिरिजकुमार माथुर : छाया मत छूना
Chapter: [1.07] गिरिजकुमार माथुर : छाया मत छूना
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