मराठी

HSC Arts (English Medium) इयत्ता १२ वी - Maharashtra State Board Important Questions for Hindi

Advertisements
[object Object]
[object Object]
विषय
मुख्य विषय
अध्याय
Advertisements
Advertisements
Hindi
< prev  101 to 120 of 174  next > 

“जो तोको काँटा बुवै, ताहि बोइ तू फूल।” इस पंक्ति का भाव पल्लवन कीजिए।

Appears in 1 question paper
Chapter: [14] व्यावहारिक हिंदी : पल्लवन
Concept: पल्लवन

निम्नलिखित का उत्तर लगभग १०० से १२० शब्दों में लिखिए:

‘नर हो, न निराश करो मन को ', इस उक्ति का पल्लवन कीजिए।

Appears in 1 question paper
Chapter: [14] व्यावहारिक हिंदी : पल्लवन
Concept: पल्लवन

हिंदी में ‘पल्लवन’ शब्द अंग्रेजी ______ शब्द के प्रतिशब्द के रूप में आता है।

Appears in 1 question paper
Chapter: [14] व्यावहारिक हिंदी : पल्लवन
Concept: पल्लवन

निम्नलिखित का उत्तर लगभग १०० से १२० शब्दों में लिखिए:

“सेवा तीर्थयात्रा से बढ़कर है," इस उक्ति का पल्लवन कीजिए।

Appears in 1 question paper
Chapter: [14] व्यावहारिक हिंदी : पल्लवन
Concept: पल्लवन

फीचर लेखन की विशेषताएँ लिखिए ।

Appears in 1 question paper
Chapter: [15] व्यावहारिक हिंदी : फीचर लेखन
Concept: फीचर लेखन

निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर ८० से १०० शब्दों में लिखिए:

फीचर लेखन करते समय बरती जाने वाली सावधानियों पर प्रकाश डालिए।

Appears in 1 question paper
Chapter: [15] व्यावहारिक हिंदी : फीचर लेखन
Concept: फीचर लेखन

विषय का ______ शीर्षक फीचर की आत्मा है।

Appears in 1 question paper
Chapter: [15] व्यावहारिक हिंदी : फीचर लेखन
Concept: फीचर लेखन

______ को पत्रकारिता के क्षेत्र में फीचर लेखन के लिए दिए जाने वाले ‘सर्वश्रेष्ठ फीचर लेखन’ के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

Appears in 1 question paper
Chapter: [15] व्यावहारिक हिंदी : फीचर लेखन
Concept: फीचर लेखन

फीचर लेखन में ______  होनी चाहिए।

Appears in 1 question paper
Chapter: [15] व्यावहारिक हिंदी : फीचर लेखन
Concept: फीचर लेखन

अपने कनिष्ठ महाविद्‌यालय में मनाए जाने वाले ‘हिंदी दिवस समारोह’ का सूत्र संचालन कीजिए।

Appears in 1 question paper
Chapter: [16] व्यावहारिक हिंदी : मैं उद्घोषक
Concept: मैं उद्घोषक

निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

मैं इस बात का ध्यान रखता हूँ कि कार्यक्रम कोई भी हो, मंच की गरिमा बनी रहे। मंचीय आयोजन में मंच पर आने वाला पहला व्यक्ति संचालक ही होता है। एंकर (उद्घोषक) का व्यक्तित्व दर्शकों की पहली नजर में ही सामने आता है। अतएव उसका परिधान, वेशभूषा, केश सज्जा इत्यादि सहज व गरिमामयी होनी चाहिए। उद्घोषक या एंकर के रूप में जब वह मंच पर होता है तो उसका व्यक्तित्व और उसका आत्मविश्वास ही उसके शब्दों में उतरकर श्रोता तक पहुँचता है। सतर्कता, सहजता और उत्साहवर्धन उसके मुख्य गुण हैं। मेरे कार्यक्रम का आरंभ जिज्ञासाभरा होता है। बीच-बीच में प्रसंगानुसार कोई रोचक दृष्टांत, शेर-ओ-शायरी या कविताओं के अंश का प्रयोग करता हूँ। जैसे- एक कार्यक्रम में वक्ता महिलाओं की तुलना गुलाब से करते हुए कह रहे थे कि महिलाएँ बोलती भी ज्यादा हैं और हँसती भी ज्यादा हैं। बिलकुल खिले गुलाबों की तरह वगैरह ...। जब उनका वक्तव्य खत्म हुआ तो मैंने उन्हें धन्यवाद देते हुए कहा कि सर आपने कहा कि महिलाएँ हँसती-बोलती बहुत ज्यादा हैं।

(१) वाक्य पूर्ण कीजिए: (२)

  1. मंचीय आयोजन में मंच पर आने वाला पहला व्यक्ति ______।
  2. मेरे कार्यक्रम का आरंभ ______।
  3. मैं इस बात का ध्यान रखता हूँ कि कार्यक्रम कोई भी हो ______।
  4. एंकर (उद्घोषक) का व्यक्तित्व दर्शकों की ______।

(२) निम्नलिखित शब्दों के लिए परिच्छेद में आए हुए प्रत्यययुक्त शब्द लिखिए: (२)

  1. व्यक्ति - ______
  2. सहज - ______
  3. सतर्क - ______
  4. गरिमा - ______

(३) ‘व्यक्तित्व विकास में भाषा का महत्व’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)

Appears in 1 question paper
Chapter: [16] व्यावहारिक हिंदी : मैं उद्घोषक
Concept: मैं उद्घोषक

किसी भी कार्यक्रम में मंच ______ की बहुत अहम भूमिका होती है।

Appears in 1 question paper
Chapter: [16] व्यावहारिक हिंदी : मैं उद्घोषक
Concept: मैं उद्घोषक

परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

             अच्छे मंच संचालक के लिए आवश्यक है - अच्छी तैयारी। वर्तमान समय में संगीत संध्या, बर्थ डे पार्टी या अन्य मंचीय कार्यक्रमों के लिए मंच संचालन आवश्यक हो गया है। मैंने भी इस तरह के अनेक कार्यक्रमों के लिए सूत्र संचालन किया है। जिस तरह का कार्यक्रम हो, तैयारी भी उसी के अनुसार करनी होती है। मैं भी सर्वप्रथम यह देखता हूँ कि कार्यक्रम का स्वरूप क्या है? सामाजिक, शैक्षिक, राजनीतिक, कवि सम्मेलन, मुशायरा या सांस्कृतिक कार्यक्रम! फिर उसी रूप में मैं कार्यक्रम का संहिता लेखन करता हूँ। इसके लिए कड़ी साधना व सतत प्रयास आवश्यक है। कार्यक्रम की सफलता सूत्र संचालक के हाथ में होती है। वह दो व्यक्तियों, दो घटनाओं के बीच कड़ी जोड़ने का काम करता है। इसलिए संचालक को चाहिए कि वह संचालन के लिए आवश्यक तत्त्वों का अध्ययन करे। सूत्र संचालक के लिए कुछ महत्त्वपूर्ण गुणों का होना आवश्यक है। हँसमुख, हाजिरजवाबी, विविध विषयों का ज्ञाता होने के साथ-साथ उसका भाषा पर प्रभुत्व होना आवश्यक है। कभी-कभी किसी कार्यक्रम में ऐन वक्त पर परिवर्तन होने की संभावना रहती है। यहाँ सूत्र संचालक के भाषा प्रभुत्व की परीक्षा होती है। पूर्व निर्धारित अतिथियों का न आना, यदि आ भी जाए तो उनकी दिनभर की कार्य व्यस्तता का विचार करते हुए कार्यक्रम पत्रिका में संशोधन/सुधार करना पड़ता है। आयोजकों की ओर से अचानक मिली सूचना के अनुसार संहिता में परिवर्तन कर संचालन करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाना ही सूत्र संचालक की विशेषता होती है।

(१) संजाल पूर्ण कीजिए: (२)

(२) निम्नलिखित विधान ‘सत्य’ हैं या ‘असत्य’ लिखिए: (२)

  1. कार्यक्रम की सफलता वक्ता के हाथ में होती है।
  2. सूत्र संचालक दो व्यक्तियों, दो घटनाओं के बीच कड़ी जोड़ने का काम करता है।
  3. कार्यक्रम में ऐन वक्त पर परिवर्तन होने की संभावना कभी नहीं रहती।
  4. कार्यक्रम को सफल बनाना सूत्र संचालक की विशेषता होती है।

(३) ‘सूत्र संचालन रोजगार का उत्तम साधन है’, इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)

Appears in 1 question paper
Chapter: [16] व्यावहारिक हिंदी : मैं उद्घोषक
Concept: मैं उद्घोषक

परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

“सूत्र संचालन के मुख्यतः निम्न प्रकार हैं- शासकीय कार्यक्रम का सूत्र संचालन, दूरदर्शन हेतु सूत्र संचालन, रेडियो हेतु सूत्र संचालन, राजनीतिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सूत्र संचालन।"

  • शासकीय एवं राजनीतिक कार्यक्रम का सूत्र संचालन:

शासकीय एवं राजनीतिक समारोह के सूत्र संचालन में प्रोटोकॉल का बहुत ध्यान रखना पड़ता है। पदों के अनुसार नामों की सूची बनानी पड़ती है।किसका-किसके हाथों सत्कार करना है; इसकी योजना बनानी पड़ती है। इस प्रकार का सूत्र संचालन करते समय अति अलंकारिक भाषा के प्रयोग से बचना चाहिए। 

  • दूरदर्शन तथा रेडियो कार्यक्रम का सूत्र संचालन:

दूरदर्शन अथवा रेडियो पर प्रसारित किए जाने वाले कार्यक्रम/समारोह की संपूर्ण जानकारी होनी चाहिए। कार्यक्रम की संहिता लिखकर तैयार करनी चाहिए। उसके पश्चात्‌ कार्यक्रम प्रारंभ करना चाहिए और धीरे-धीरे उसका विकास करते जाना चाहिए। भाषा का प्रयोग कार्यक्रम और प्रसंगानुसार किया जाना चाहिए। रोचकता और विभिन्‍न संदर्भ का समावेश कार्यक्रम में चार चाँद लगा देते हैं।

स्मरण रहे-सूत्र संचालक मंच और श्रोताओं के बीच सेतु का कार्य करता है। सूत्र संचालन करते समय रोचकता, रंजकता, विविध प्रसंगों का उल्लेख करना आवश्यक होता है। कार्यक्रम/समारोह में निखार लाना सूत्र संचालक का महत्त्वपूर्ण कार्य होता है। कार्यक्रम के अनुसार सूत्र संचालक को अपनी भाषा और शैली में परिवर्तन करना चाहिए; जैसे गीतों अथवा मुशायरे का कार्यक्रम हो तो भावपूर्ण एवं सरल भाषा का प्रयोग अपेक्षित है तो व्याख्यान अथवा वैचारिक कार्यक्रम में संदर्भ के साथ सटीक शब्दों का प्रयोग आवश्यक है। सूत्र संचालन करते समय उसके सामने सुनने वाले कौन हैं; इसका भी ध्यान रखना चाहिए।

  1. कृति पूर्ण कीजिए:      [2]
    सूत्र संचालन के मुख्य प्रकार:
    1. ______
    2. ______
    3. ______
    4. ______ 
  2. गदयांश में से 'इक' प्रत्यय लगे हुए शब्द ढूँढ़कर लिखिए:     [2]
    1. ______
    2. ______
    3. ______
    4. ______
  3. "किसी भी कार्यक्रम के लिए सूत्र संचालन आवश्यक होता है," इस विषय पर ४० से ५० शब्दों में अपने विचार लिखिए।       [2]
Appears in 1 question paper
Chapter: [16] व्यावहारिक हिंदी : मैं उद्घोषक
Concept: मैं उद्घोषक

लेखक आनंद सिंह जी ने ______ तक रेडियो उद्घोषक के रूप में सेवाएँ प्रदान कीं।

Appears in 1 question paper
Chapter: [16] व्यावहारिक हिंदी : मैं उद्घोषक
Concept: मैं उद्घोषक

विपुल पठन, ______ तथा भाषा का समुचित ज्ञान होना आवश्यक है।

Appears in 1 question paper
Chapter: [17] व्यावहारिक हिंदी : ब्लॉग लेखन
Concept: ब्लॉग लेखन

______ लेखन में शब्दसंख्या का बंधन नहीं होता।

Appears in 1 question paper
Chapter: [17] व्यावहारिक हिंदी : ब्लॉग लेखन
Concept: ब्लॉग लेखन

जॉन बर्गर ने ब्लॉग के लिए  ______ शब्द का प्रयोग किया था।

Appears in 1 question paper
Chapter: [17] व्यावहारिक हिंदी : ब्लॉग लेखन
Concept: ब्लॉग लेखन

निम्नलिखित का उत्तर लगभग ८० से १०० शब्दों में लिखिए:

प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवों द्‌वारा प्रकाश उत्पन्न करने के उद्देश्यों की जानकारी दीजिए।

Appears in 1 question paper
Chapter: [18] व्यावहारिक हिंदी : प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव
Concept: प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव

मानव सहित विश्व के अधिकांश जीवों के जीवन में ______ का बहुत महत्त्व है।

Appears in 1 question paper
Chapter: [18] व्यावहारिक हिंदी : प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव
Concept: प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव
< prev  101 to 120 of 174  next > 
Advertisements
Advertisements
Maharashtra State Board HSC Arts (English Medium) इयत्ता १२ वी Important Questions
Important Questions for Maharashtra State Board HSC Arts (English Medium) इयत्ता १२ वी Book Keeping and Accountancy
Important Questions for Maharashtra State Board HSC Arts (English Medium) इयत्ता १२ वी Economics
Important Questions for Maharashtra State Board HSC Arts (English Medium) इयत्ता १२ वी English
Important Questions for Maharashtra State Board HSC Arts (English Medium) इयत्ता १२ वी Geography
Important Questions for Maharashtra State Board HSC Arts (English Medium) इयत्ता १२ वी Hindi
Important Questions for Maharashtra State Board HSC Arts (English Medium) इयत्ता १२ वी History
Important Questions for Maharashtra State Board HSC Arts (English Medium) इयत्ता १२ वी Information Technology
Important Questions for Maharashtra State Board HSC Arts (English Medium) इयत्ता १२ वी Marathi
Important Questions for Maharashtra State Board HSC Arts (English Medium) इयत्ता १२ वी Mathematics and Statistics
Important Questions for Maharashtra State Board HSC Arts (English Medium) इयत्ता १२ वी Political Science
Important Questions for Maharashtra State Board HSC Arts (English Medium) इयत्ता १२ वी Psychology
Important Questions for Maharashtra State Board HSC Arts (English Medium) इयत्ता १२ वी Sociology
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×