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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गईं सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
| अम्मा बताती हैं- हमारी शादी में चढ़ावे के नाम पर सिर्फ पाँच ग्राम सोने के गहने आए थे, लेकिन जब हम विदा होकर रामनगर आए तो वहाँ उन्हें मुँह दिखाई में गहने मिले। सभी नाते-रिश्तेवालों ने कुछ-न-कुछ दिया था। जिन दिनों हम लोग बहादुरगंज के मकान में आए, उन्हीं दिनों तुम्हारे बाबू जी के चाचा जी को कोई घाटा लगा था। किसी तरह से बाकी का रुपया देने की जिम्मेदारी हम पर आ पड़ी-बात क्या थी, उसकी ठीक से जानकारी लेने की जरूरत हमने नहीं सोची और न ही इसके बारे में कभी कुछ पूछताछ की। एक दिन तुम्हारे बाबू जी ने दुनिया की मुसीबतों और मनुष्य की मजबूरियों को समझाते हुए जब हमसे गहनों की माँग की तो क्षण भर के लिए हमें कुछ वैसा लगा और गहना देने में तनिक हिचकिचाहट महसूस हुई पर यह सोचा कि उनकी प्रसन्नता में हमारी खुशी है, हमने गहने दे दिए। केवल टीका, नथुनी, बिछिया रख लिए थे। वे हमारे सुहागवाले गहने थे। उस दिन तो उन्होंने कुछ नहीं कहा, पर दूसरे दिन वे अपनी पीड़ा न रोक सके। कहने लगे- “तुम जब मिरजापुर जाओगी और लोग गहनों के संबंध में पूछेंगे तो क्या कहोगी?” |
(1) आकृति में लिखिए: (2)
(i)

(ii)

(2) निम्नलिखित वाक्य उचित क्रम लगाकर लिखिए: (2)
- मुँह दिखाई में गहने मिले।
- बाबू जी अपनी पीड़ा न रोक सके।
- विदा होकर रामनगर आना।
- पाँच ग्राम सोने के गहने आना।
(3) वचन परिवर्तन करके लिखिए: (2)
- रिश्ता -
- दिन -
- शादी -
- मुसीबत -
(4) ‘पारिवारिक सुख-दुख में प्रत्येक का सहभाग’ इस विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)
Concept: ईमानदारी की प्रतिमूर्ति
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
|
गाड़ी ले हम चल पड़े। क्या शान की सवारी थी। याद कर बदन में झुरझुरी आने लगी है। जिसके यहाँ खाना था, वहाँ पहुँचा। बातचीत में समय का ध्यान नहीं रहा। देर हो गई। याद आया बाबू जी आ गए होंगे। वापस घर आ फाटक से पहले ही गाड़ी रोक दी। उतरकर गेट तक आया। संतरी को हिदायत दी। यह सैलूट-वैलूट नहीं, बस धीरे से गेट खोल दो। वह आवाज करे तो उसे बंद मत करो, खुला छोड़ दो। बाबू जी का डर। वह खट-पट सैलूट मारेगा तो आवाज होगी और फिर गेट की आवाज से बाबू जी को हम लोगों के लौटने का अंदाजा हो जाएगा। वे बेकार में पूछताछ करेंगे। अभी बात ताजा है। सुबह तक बात में पानी पड़ चुका होगा। संतरी से जैसा कहा गया, उसने किया। दबे पैर पीछे किचन के दरवाजे से अंदर घुसा। जाते ही अम्मा मिलीं। पूछा - ‘‘बाबू जी आ गए? कुछ पूछा तो नहीं ?’’ बोली - ‘‘हाँ, आ गए। पूछा था। मैंने बता दिया।’’ |
(1) उत्तर लिखिए: (2)
लेखक द्वारा संतरी को दी गई दो सूचनाएँ:
- ______
- ______
(2) लिखिए: (2)
- शान की सवारी याद आने का परिणाम ______
- बातचीत में समय बिताने का परिणाम ______
(3)
(क) गद्यांश से ऐसे दो शब्द ढूँढ़कर लिखिए जिनका वचन परिवर्तन से रूप नहीं बदलता: (1)
- ______
______
(ख) गदयांश में प्रयुक्त शब्द-युग्म ढूँढकर लिखिए: (1)
- ______
- ______
(4) ‘दादा-दादी के प्रति मेरा कर्तव्य’ विषय पर अपने विचार लिखिए। (2)
Concept: ईमानदारी की प्रतिमूर्ति
निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
|
हम उस धरती के लड़के हैं, जिस धरती की बातें यह मिट्टी, हुए प्रहलाद जहाँ, जो अपनी लगन के थे सच्चे। इस कारण हम तुमसे बढ़कर, हम सबके आगे चुप रहिए। |
1. सूचनानुसार लिखिए: (2)
- ऐसी पंक्ति जिसमें पौराणिक संदर्भ है - ______
- ऐसी पंक्ति जिसमें ऐतिहासिक संदर्भ हो - ______
2. 'इतिहास हमें प्रेरणा देता है' विषय पर २५ से ३० शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)
Concept: हम इस धरती की संतति हैं
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
|
रात का समय था। बुद्धिराम के द्वार पर शहनाई बज रही थी और गाँव के बच्चों का झुंड विस्मयपूर्ण नेत्रों से गाने का रसास्वादन कर रहा था। चारपाइयों पर मेहमान विश्राम कर रहे थे। दो-एक अंग्रेजी पढ़े हुए नवयुवक इन व्यवहारों से उदासीन थे। वे इस गँवार मंडली में बोलना अथवा सम्मिलित होना अपनी प्रतिष्ठा के प्रतिकूल समझते थे। आज बुद्धिराम के बड़े लड़के मुखराम का तिलक आया था। यह उसी का उत्सव था। घर के भीतर स्त्रियाँ गा रही थीं और रूपा मेहमानों के लिए भोजन के प्रबंध में व्यस्त थी। भट्टियों पर कड़ाह चढ़ रहे थे। एक में पूड़ियाँ-कचौड़ियाँ निकल रही थीं, दूसरे में अन्य पकवान बन रहे थे। एक बड़े हंडे में मसालेदार तरकारी पक रही थीं। घी और मसाले की क्षुधावर्धक सुगंध चारों ओर फैली हुई थी। |
(1) एक-दो शब्दों में उत्तर लिखिए: (2)
- इसका तिलक आया था -
- द्वार पर बज रही थी -
- बड़े हंडे में पक रही थी -
- चारपाइयों पर विश्राम कर रहे थे -
(2) ‘सांस्कृतिक परंपरा के संवर्धन में हमारा योगदान’ इस विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)
Concept: बूढ़ी काकी
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
|
रात का समय था। बुद्धिराम के द्वार पर शहनाई बज रही थी और गाँव के बच्चों का झुंड विस्मयपूर्ण नेत्रों से गाने का रसास्वादन कर रहा था। चारपाइयों पर मेहमान विश्राम कर रहे थे। दो-एक अंग्रेजी पढ़े हुए नवयुवक इन व्यवहारों से उदासीन थे। वे इस गँवार मंडली में बोलना अथवा सम्मिलित होना अपनी प्रतिष्ठा के प्रतिकूल समझते थे। आज बुद्धिराम के बड़े लड़के मुखराम का तिलक आया था। यह उसी का उत्सव था। घर के भीतर स्त्रियाँ गा रही थीं और रूपा मेहमानों के लिए भोजन के प्रबंध में व्यस्त थी। भट्ठियों पर कड़ाह चढ़ रहे थे। एक में पूड़ियाँ-कचौड़ियाँ निकल रही थीं, दूसरे में अन्य पकवान बन रहे थे। एक बड़े हंडे में मसालेदार तरकारी पक रही थी। घी और मसाले की क्षुधावर्धक सुगंध चारों ओर फैली हुई थी। |
(1) उत्तर लिखिए: (2)
मुखराम के तिलक उत्सव की तैयारियाँ:
- ______
- ______
(2) ‘उत्सवों का बदलता स्वरूप’ अपने विचार लिखिए। (2)
Concept: बूढ़ी काकी
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।
| रूपा उस समय कार्य भार से उद्विग्न हो रही थी। कभी इस कोठे में जाती, कभी उस कोठे में, कभी कड़ाह के पास आती, कभी भंडार में जाती। किसी ने बाहर से आकर कहा- ‘महाराज ठंडाई माँग रहे हैं।’ ठंडाई देने लगी। आदमी ने आकर पूछा- ‘अभी भोजन तैयार होने में कितना विलंब है? जरा ढोल-मंजीरा उतार दो।’ बेचारी अकेली स्त्री दौड़ते-दौड़ते व्याकुल हो रही थी, झुँझलाती थी, कुढ़ती थी, परंतु क्रोध प्रकट करने का अवसर न पाती थी। भय होता, कहीं पड़ोसिनें यह न कहने लगें कि इतने में उबल पड़ीं। प्यास से स्वयं कंठ सूख रहा था। गरमी के मारे फुँकी जाती थी परंतु इतना अवकाश भी नहीं था कि जरा पानी पी ले अथवा पंखा लेकर झले। यह भी खटका था कि जरा आँख हटी और चीजों की लूट मची। |
- संजाल पूर्ण कीजिए: [2]

- ‘कर्तव्यनिष्ठा और कार्यपूर्ति’ विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। [2]
Concept: बूढ़ी काकी
निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर पद्य विश्लेषण कीजिए:
| मुद्दे | समता की ओर |
| (1) रचनाकार का नाम | |
| (2) रचना की विधा | |
| (3) पसंद की पंक्तियाँ | |
| (4) पंक्तियाँ पसंद होने का कारण | |
| (5) रचना से प्राप्त संदेश/प्रेरणा |
Concept: समता की ओर
निम्नलिखित वाक्य में उचित विरामचिह्नों का प्रयोग कर वाक्य पुनः लिखिए:
केवल टीका नथुनी और बिछिया रख लिए थे
Concept: विरामचिह्न
निम्नलिखित वाक्य में उचित विरामचिन्हो का प्रयोग कर वाक्य पुनः लिखिए:
टाँग का टूटना यानी सार्वजनिक अस्पताल में कुछ दिन रहना
Concept: विरामचिह्न
निम्नलिखित वाक्य में सूचना के अनुसार काल परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए:
सातों तारे मंद पड़े। (अपूर्ण वर्तमानकाल)
Concept: क्रिया के काल (काल परिवर्तन)
कोष्ठक की सूचना के अनुसार निम्न वाक्य में अर्थ के आधार पर परिवर्तन कीजिए:
मैं आज रात का खाना नहीं खाऊँगा। (विधानार्थक वाक्य)
Concept: वाक्य के भेद
कोष्ठक की सूचना के अनुसार निम्न वाक्य में अर्थ के आधार पर परिवर्तन कीजिए:
मैं आज रात का खाना नहीं खाऊँगा। (विधानार्थक वाक्य)
Concept: वाक्य के भेद
कोष्ठक की सूचना के अनुसार निम्न वाक्य में अर्थ के आधार पर परिवर्तन कीजिए:
गाय ने दूध देना बंद कर दिया। (विस्मयार्थक वाक्य)
Concept: वाक्य के भेद
कोष्ठक की सूचना के अनुसार निम्न वाक्य में अर्थ के आधार पर परिवर्तन कीजिए:
गाय ने दूध देना बंद कर दिया। (विस्मयार्थक वाक्य)
Concept: वाक्य के भेद
रचना के आधार पर वाक्य का भेद पहचानकर कोष्ठक में लिखिए:
उसे देख-देख बड़ा जी करता कि मौका मिलते ही उसे चलाऊँ।
Concept: वाक्य के भेद
रचना के आधार पर वाक्य का भेद पहचानकर कोष्ठक में लिखिए:
उसे देख-देख बड़ा जी करता कि मौका मिलते ही उसे चलाऊँ।
Concept: वाक्य के भेद
निम्न वाक्यों में अधोरेखांकित शब्द समूह के लिए कोष्ठक में दिए गए मुहावरों में से उचित मुहावरे का चयन कर वाक्य फिर से लिखिए :
सार्वजनिक अस्पताल का खयाल आते ही मैं भयभीत हो गया।
वाक्य = ______
Concept: मुहावरे और कहावतें
निम्न वाक्य में अधोरेखांकित शब्द समूह के लिए कोष्ठक में दिए गए मुहावरों में से उचित मुहावरे का चयन कर वाक्य फिर से लिखिए:
(इज्जत उतारना, हाथ फेरना, काँप उठना, तिलमिला जाना, दुम हिलाना, बोलबाला होना)
क्या आपने मुझे अपमानित करने के लिए यहाँ बुलाया था?
वाक्य = ..........
Concept: मुहावरे और कहावतें
निम्नलिखित मुहावरे का अर्थ लिखकर उसका अर्थपूर्ण वाक्य में प्रयोग कीजिए:
सीना तानकर खड़े रहना
Concept: मुहावरे और कहावतें
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखकर उनका अर्थपूर्ण वाक्यों में प्रयोग कीजिए:
टाँग अड़ाना
Concept: मुहावरे और कहावतें
