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SSC (English Medium) १० वीं कक्षा - Maharashtra State Board Question Bank Solutions for Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

मैं लरजकर बोला,
मुद्राएँ आप मेरे मुख पर देख लीजिए,
वे खड़े होकर कुछ सोचने लगे
फिर शयनकक्ष में घुस गए
और फटे हुए तकिये की रूई नोचने लगे
उन्होंने टूटी अलमारी को खोला
रसोई की खाली पीपियों को टटोला
बच्चों की गुल्लक तक देख डाली
पर सब में मिला एक ही तत्त्व खाली .......
कनस्तरों को, मटकों को ढूँढ़ा सब में मिला शून्य-ब्रह्मांड

1. आकृति पूर्ण कीजिए: (2)

2. पद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए: (1)

i. ऐसे शब्द जिनका अर्थ निम्न शब्द हो:

  1. टीन का पीप - ______
  2. कमरा - ______

ii. वचन परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए: (1)
उन्होंने टूटी अलमारी को खोला।
________________________

3. अंतिम चार पंक्तियों का सरल अर्थ २५ से ३० शब्दों में लिखिए। (2)

[2.04] छापा
Chapter: [2.04] छापा
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

         जिस गली में आजकल रहता हूँ – वहाँ एक आसमान भी है लेकिन दिखाई नहीं देता। उस गली में पेड़ भी नहीं हैं, न ही पेड़ लगाने की गुंजाइश ही है। मकान ही मकान हैं। इतने मकान कि लगता है मकान पर मकान लदे हैं। लंद-फंद मकानों की एक बहुत बड़ी भीड़, जो एक सँकरी गली में फँस गई और बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है। जिस मकान में रहता हूँ, उसके बाहर झाँकने से 'बाहर' नहीं सिर्फ दूसरे मकान और एक गंदी व तंग गली दिखाई देती है। चिड़ियाँ दिखती हैं, लेकिन पेड़ों पर बैठीं या आसमान में उड़तीं हुई नहीं। बिजली या टेलीफोन के तारों पर बैठी, मगर बातचीत करतीं या घरों के अंदर यहाँ-वहाँ घोंसले बनाती नहीं दिखतीं।

1. लिखिए: (2)

गद्यांश में उल्लेखित चिड़ियों की विशेषताएँ –

  1. ____________
  2. ____________

2. 'पक्षियों की घटती संख्या' विषय पर २५ से ३० शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)

[1.07] खुला आकाश (पूरक पठन)
Chapter: [1.07] खुला आकाश (पूरक पठन)
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

हम उस धरती के लड़के हैं, जिस धरती की बातें
क्या कहिए; अजी क्या कहिए; हाँ क्या कहिए।
यह वह मिट्टी, जिस मिट्टी में खेले थे यहाँ ध्रुव-से बच्चे।

यह मिट्टी, हुए प्रहलाद जहाँ, जो अपनी लगन के थे सच्चे।
शेरों के जबड़े खुलवाकर, थे जहाँ भरत दतुली गिनते,
जयमल-पत्ता अपने आगे, थे नहीं किसी को कुछ गिनते!

इस कारण हम तुमसे बढ़कर, हम सबके आगे चुप रहिए।
अजी चुप रहिए, हाँ चुप रहिए। हम उस धरती के लड़के हैं...

1. सूचनानुसार लिखिए: (2)

  1. ऐसी पंक्ति जिसमें पौराणिक संदर्भ है - ______
  2. ऐसी पंक्ति जिसमें ऐतिहासिक संदर्भ हो - ______

2. 'इतिहास हमें प्रेरणा देता है' विषय पर २५ से ३० शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)

[2.06] हम इस धरती की संतति हैं (पूरक पठन)
Chapter: [2.06] हम इस धरती की संतति हैं (पूरक पठन)
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निम्नलिखित वाक्य में अधोरेखांकित शब्द का शब्दभेद पहचानकर लिखिए:

श्रमजीवियों की मजदूरी एवं आमदनी कम है।

[3] व्याकरण विभाग (भाषा अध्ययन)
Chapter: [3] व्याकरण विभाग (भाषा अध्ययन)
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निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए, जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों:

        स्वाधीन भारत में अभी तक अंग्रेजी हवाओं में कुछ लोग यह कहते मिलेंगे – जब तक विज्ञान और तकनीकी ग्रंथ हिंदी में न हो तब तक कैसे हिंदी में शिक्षा दी जाए। जब कि स्वामी श्रद्धानंद स्वाधीनता से भी चालीस साल पहले गुरुकुल काँगड़ी में हिंदी के माध्यम से विज्ञान जैसे गहन विषयों की शिक्षा दे रहे थे। ग्रंथ भी हिंदी में थे और पढ़ाने वाले भी हिंदी के थे। जहाँ चाह होती है वहीं राह निकलती है। एक लंबे अरसे तक अंग्रेज गुरुकुल काँगड़ी को भी राष्ट्रीय आंदोलन का अभिन्न अंग मानते रहे। इसमें कोई संदेह भी नहीं कि गुरुकुल के स्नातकों में स्वाधीनता की अजीब तड़प थी। स्वामी श्रद्धानंद जैसा राष्ट्रीय नेता जिस गुरुकुल का संस्थापक हो और हिंदी शिक्षा का माध्यम हो; वहीं राष्ट्रीयता नहीं पनपेगी तो कहाँ पनपेगी। स्वामी जी से मिलने देश के प्रमुख राष्ट्रीय नेता भी गुरुकुल आते रहते थे।

[5] अपठित विभाग
Chapter: [5] अपठित विभाग
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गईं सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

अम्मा बताती हैं- हमारी शादी में चढ़ावे के नाम पर सिर्फ पाँच ग्राम सोने के गहने आए थे, लेकिन जब हम विदा होकर रामनगर आए तो वहाँ उन्हें मुँह दिखाई में गहने मिले। सभी नाते-रिश्तेवालों ने कुछ-न-कुछ दिया था। जिन दिनों हम लोग बहादुरगंज के मकान में आए, उन्हीं दिनों तुम्हारे बाबू जी के चाचा जी को कोई घाटा लगा था। किसी तरह से बाकी का रुपया देने की जिम्मेदारी हम पर आ पड़ी-बात क्‍या थी, उसकी ठीक से जानकारी लेने की जरूरत हमने नहीं सोची और न ही इसके बारे में कभी कुछ पूछताछ की। एक दिन तुम्हारे बाबू जी ने दुनिया की मुसीबतों और मनुष्य की मजबूरियों को समझाते हुए जब हमसे गहनों की माँग की तो क्षण भर के लिए हमें कुछ वैसा लगा और गहना देने में तनिक हिचकिचाहट महसूस हुई पर यह सोचा कि उनकी प्रसन्नता में हमारी खुशी है, हमने गहने दे दिए। केवल टीका, नथुनी, बिछिया रख लिए थे। वे हमारे सुहागवाले गहने थे। उस दिन तो उन्होंने कुछ नहीं कहा, पर दूसरे दिन वे अपनी पीड़ा न रोक सके। कहने लगे- “तुम जब मिरजापुर जाओगी और लोग गहनों के संबंध में पूछेंगे तो क्या कहोगी?”

(1) आकृति में लिखिए: (2)

(i)

(ii) 

(2) निम्नलिखित वाक्य उचित क्रम लगाकर लिखिए: (2)

  1. मुँह दिखाई में गहने मिले।
  2. बाबू जी अपनी पीड़ा न रोक सके।
  3. विदा होकर रामनगर आना।
  4. पाँच ग्राम सोने के गहने आना।

(3) वचन परिवर्तन करके लिखिए: (2)

  1. रिश्ता -
  2. दिन -
  3. शादी -
  4. मुसीबत -

(4) ‘पारिवारिक सुख-दुख में प्रत्येक का सहभाग’ इस विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)

[2.05] ईमानदारी की प्रतिमूर्ति
Chapter: [2.05] ईमानदारी की प्रतिमूर्ति
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

घन घमंड नभ गरजत घोरा। प्रिया हीन डरपत मन मोरा।।

दामिनि दमक रहहिं घन माहीं। खल कै प्रीति जथा थिर नाहीं।।

बरषहिं जलद भूमि निअराएँ। जथा नवहिं बुध विद्या पाएँ।।

बूँद अघात सहहिं गिरि कैसे। खल के बचन संत सह जैसे।।

छुद्र नदी भरि चली तोराई। जस थोरेहुँ धन खल इतराई।।

भूमि परत भा ढाबर पानी। जनु जीवहिं माया लपटानी।।

समिटि-समिटि जल भरहिं तलावा। जिमि सदगुन सज्जन पहिं आवा।।

सरिता जल जलनिधि महुँ जाईं। होई अचल जिमि जिव हरि पाई।।

(1) लिखिए:        (2)

पद्यांश में आए जल स्रोत- 

  1. ______
  2. ______
  3. ______
  4. ______

(2) निम्न शब्दों के लिए पद्यांश में प्रयुक्त समानार्थी शब्द लिखिए:     (2)

  1. गगन -
  2. पर्वत -
  3. बिजली -
  4. दुष्ट -

(3) उपर्युक्त पद्यांश की अंतिम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।        (2)

[2.01] बरषहिं जलद
Chapter: [2.01] बरषहिं जलद
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

रात का समय था। बुद्धिराम के द्वार पर शहनाई बज रही थी और गाँव के बच्चों का झुंड विस्मयपूर्ण नेत्रों से गाने का रसास्वादन कर रहा था। चारपाइयों पर मेहमान विश्राम कर रहे थे। दो-एक अंग्रेजी पढ़े हुए नवयुवक इन व्यवहारों से उदासीन थे। वे इस गँवार मंडली में बोलना अथवा सम्मिलित होना अपनी प्रतिष्ठा के प्रतिकूल समझते थे।

आज बुद्धिराम के बड़े लड़के मुखराम का तिलक आया था। यह उसी का उत्सव था। घर के भीतर स्त्रियाँ गा रही थीं और रूपा मेहमानों के लिए भोजन के प्रबंध में व्यस्त थी। भट्टियों पर कड़ाह चढ़ रहे थे। एक में पूड़ियाँ-कचौड़ियाँ निकल रही थीं, दूसरे में अन्य पकवान बन रहे थे। एक बड़े हंडे में मसालेदार तरकारी पक रही थीं। घी और मसाले की क्षुधावर्धक सुगंध चारों ओर फैली हुई थी।

(1) एक-दो शब्दों में उत्तर लिखिए: (2)

  1. इसका तिलक आया था -
  2. द्वार पर बज रही थी -
  3. बड़े हंडे में पक रही थी -
  4. चारपाइयों पर विश्राम कर रहे थे -

(2) ‘सांस्कृतिक परंपरा के संवर्धन में हमारा योगदान’ इस विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)

[2.1] बूढ़ी काकी (पूरक पठन)
Chapter: [2.1] बूढ़ी काकी (पूरक पठन)
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

घना अँधेरा
चमकता प्रकाश
और अधिक।

करते जाओ
पाने की मत सोचो
जीवन सारा।

जीवन नैया
मँझधार में डोले
सँभाले कौन?

रंग-बिरंगे
रंग-संग लेकर
आया फागुन।

(1) ऐसे प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर निम्न शब्द हों: (2)

  1. जीवन नैया -
  2. फागुन -

(2) ‘जीवन एक संघर्ष है’ इस पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)

[1.04] मन (पूरक पठन)
Chapter: [1.04] मन (पूरक पठन)
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निम्नलिखित वाक्य के अधोरेखांकित शब्द का शब्दभेद पहचानकर लिखिए:

आज फिर उसे साक्षात्कार के लिए जाना है।

[3] व्याकरण विभाग (भाषा अध्ययन)
Chapter: [3] व्याकरण विभाग (भाषा अध्ययन)
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

गाड़ी ले हम चल पड़े। क्या शान की सवारी थी। याद कर बदन में झुरझुरी आने लगी है। जिसके यहाँ खाना था, वहाँ पहुँचा। बातचीत में समय का ध्यान नहीं रहा। देर हो गई।

याद आया बाबू जी आ गए होंगे।

वापस घर आ फाटक से पहले ही गाड़ी रोक दी। उतरकर गेट तक आया। संतरी को हिदायत दी। यह सैलूट-वैलूट नहीं, बस धीरे से गेट खोल दो। वह आवाज करे तो उसे बंद मत करो, खुला छोड़ दो।

बाबू जी का डर। वह खट-पट सैलूट मारेगा तो आवाज होगी और फिर गेट की आवाज से बाबू जी को हम लोगों के लौटने का अंदाजा हो जाएगा। वे बेकार में पूछताछ करेंगे। अभी बात ताजा है। सुबह तक बात में पानी पड़ चुका होगा। संतरी से जैसा कहा गया, उसने किया। दबे पैर पीछे किचन के दरवाजे से अंदर घुसा। जाते ही अम्मा मिलीं।

पूछा - ‘‘बाबू जी आ गए? कुछ पूछा तो नहीं ?’’

बोली - ‘‘हाँ, आ गए। पूछा था। मैंने बता दिया।’’

(1) उत्तर लिखिए: (2)

लेखक द्वारा संतरी को दी गई दो सूचनाएँ:

  1. ______
  2. ______

(2) लिखिए: (2)

  1. शान की सवारी याद आने का परिणाम ______
  2. बातचीत में समय बिताने का परिणाम ______

(3) 

(क) गद्यांश से ऐसे दो शब्द ढूँढ़कर लिखिए जिनका वचन परिवर्तन से रूप नहीं बदलता: (1)

  1. ______

______

(ख) गदयांश में प्रयुक्त शब्द-युग्म ढूँढकर लिखिए: (1)

  1. ______
  2. ______

(4) ‘दादा-दादी के प्रति मेरा कर्तव्य’ विषय पर अपने विचार लिखिए। (2)

[2.05] ईमानदारी की प्रतिमूर्ति
Chapter: [2.05] ईमानदारी की प्रतिमूर्ति
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निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

संस्कृति ऐसी चीज नहीं है कि जिसकी रचना दस-बीस या सौ-पचास वर्षों में की जा सकती हो। अनेक शताब्दियों तक एक समाज के लोग जिस तरह खाते-पीते, रहते-सहते, पढ़ते-लिखते, सोचते-समझते और राज-काज चलाते अथवा धर्म-कर्म करते हैं, उन सभी कार्यों से उनकी संस्कृति उत्पन्न होती है। हम जो कुछ भी करते हैं, उसमें हमारी संस्कृति की झलक होती है। यहाँ तक कि हमारे उठने-बैठने, पहनने-ओढ़ने, घूमने-फिरने और रोने-हँसने में भी हमारी संस्कृति की पहचान होती है। हमारा कोई भी काम हमारी संस्कृति का पर्याय नहीं बन सकता।असल में संस्कृति जिंदगी का एक तरीका है और यह तरीका सदियों से जमा होकर उस समाज में छाया रहता है, जिसमें हम जन्म लेते हैं। इसलिए जिस समाज में हम पैदा हुए हैं, अथवा जिस समाज से मिलकर हम जी रहे हैं, उसकी संस्कृति हमारी संस्कृति है।

(1) घटक लिखिए: (2)

(2) विधानों को पढ़कर केवल सही अथवा गलत लिखिए: (2)

  1. समाज के लोगों के कार्यों से उनकी संस्कृति उत्पन होती है ______
  2. हम जो कुछ भी करते हैं, उसमें हमारी संस्कृति की झलक नहीं होती ______
  3. जिस संस्कृति में हम पैदा हुए हैं उसकी संस्कृति हमारी संस्कृति है ______
  4. संस्कृति जिंदगी का तरीका नहीं है ______

(3) दी गई सूचना के अनुसार लिखिए: (2)

(4) ‘पाश्चात्य संस्कृति का बढ़ता प्रभाव’ अपने विचार लिखिए। (2)

[5] अपठित विभाग
Chapter: [5] अपठित विभाग
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निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर पद्य विश्लेषण कीजिए:

मुद्दे समता की ओर
(1) रचनाकार का नाम  
(2) रचना की विधा  
(3) पसंद की पंक्तियाँ  
(4) पंक्तियाँ पसंद होने का कारण  
(5) रचना से प्राप्त संदेश/प्रेरणा  
[2.11] समता की ओर
Chapter: [2.11] समता की ओर
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

रात का समय था। बुद्‌धिराम के द्‌वार पर शहनाई बज रही थी और गाँव के बच्चों का झुंड विस्‍मयपूर्ण नेत्रों से गाने का रसास्‍वादन कर रहा था। चारपाइयों पर मेहमान विश्राम कर रहे थे। दो-एक अंग्रेजी पढ़े हुए नवयुवक इन व्यवहारों से उदासीन थे। वे इस गँवार मंडली में बोलना अथवा सम्‍मिलित होना अपनी प्रतिष्‍ठा के प्रतिकूल समझते थे।

आज बुद्‌धिराम के बड़े लड़के मुखराम का तिलक आया था। यह उसी का उत्‍सव था। घर के भीतर स्‍त्रियाँ गा रही थीं और रूपा मेहमानों के लिए भोजन के प्रबंध में व्यस्‍त थी। भट्‌ठियों पर कड़ाह चढ़ रहे थे। एक में पूड़ियाँ-कचौड़ियाँ निकल रही थीं, दूसरे में अन्य पकवान बन रहे थे। एक बड़े हंडे में मसालेदार तरकारी पक रही थी। घी और मसाले की क्षुधावर्धक सुगंध चारों ओर फैली हुई थी।

(1) उत्तर लिखिए: (2)

मुखराम के तिलक उत्सव की तैयारियाँ:

  1. ______
  2. ______

(2) ‘उत्सवों का बदलता स्वरूप’ अपने विचार लिखिए। (2)

[2.1] बूढ़ी काकी (पूरक पठन)
Chapter: [2.1] बूढ़ी काकी (पूरक पठन)
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

सितारे छिपे
बादलों की ओट में
सूना आकाश।

तुमने दिए
जिन गीतों को स्‍वर
हुए अमर।

सागर में भी
रहकर मछली
प्यासी ही रही।

(1) तालिका पूर्ण कीजिए: (2)

  स्थिति निवास स्थान
मछली ______ ______
सितारे ______ ______

(2) ‘रात में सितारे आकाश की शोभा बढ़ाते हैं’ अपने विचार लिखिए। (2)

[1.04] मन (पूरक पठन)
Chapter: [1.04] मन (पूरक पठन)
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अधोरेखांकित शब्द का भेद पहचानकर लिखिए:

उस आश्रम का विज्ञापन अखबार में नहीं दिया जाए।

[3] व्याकरण विभाग (भाषा अध्ययन)
Chapter: [3] व्याकरण विभाग (भाषा अध्ययन)
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निम्नलिखित शब्द का प्रयोग अपने वाक्य में कीजिए:

‘आलीशान’

[3] व्याकरण विभाग (भाषा अध्ययन)
Chapter: [3] व्याकरण विभाग (भाषा अध्ययन)
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

तिवारी जी: नागर जी, मैं आपको आपके लेखन के आरंभ काल की ओर ले चलना चाहता हूँ। जिस समय आपने लिखना शुरू किया, उस समय का साहित्यिक माहौल कया था? किन लोगों से प्रेरित होकर आपने लिखना शुरू किया और क्या आदर्श थे आपके सामने?
नागर जी: लिखने से पहले तो मैंने पढ़ना शुरू किया था। आरंभ में कवियों को ही अधिक पढ़ता था। सनेहीं जी, अयोध्यासिंह उपाध्याय की कविताएँ ज्यादा पढ़ीं। छापे का अक्षर मेरा पहला मित्र था। घर में दो पत्रिकाएँ मँगातें थे मेरे पितामह। 'एक “सरस्वती ' और दूसरी 'गृहलक्ष्मी'। उस समय हमारे सामने प्रेमचंद का साहित्य था, कौशिक का था।आरंभ में बंकिम के उपन्यास पढ़े। शरतचंद्र को बाद में। प्रभातकुमार मुखोपाध्याय का कहानी संग्रह ' देशी और विलायती' १९३० के आसपास पढ़ा। उपन्यासों में बंकिम के उपन्यास १९३० में ही पढ़ डाले। 'आनंदमठ', 'देवी चौधरानी' और एक राजस्थानी थीम पर लिखा हुआ उपन्यास, उसी समय पढ़ा था। 
तिवारी जी: कया यही लेखक आपके लेखन के आदर्श रहे ? 
नागर जी: नहीं, कोई आदर्श नहीं। केवल आनंद था पढ़ने का। सबसे पहले कविता फूटी साइमन कमीशन के बहिष्कार के समय १९२८-१९२९ में । लाठीचार्ज हुआ था। इस अनुभव से ही पहली कविता फूटी.' कब लौं कहाँ लाठी खाय'। इसे ही लेखन का आरंभ मानिए।

(1) नाम लिखिए-     (2)

(i)

(ii)

(2) लिखिए-     (2)

  1. लेखक ने शुरू में इन्हें पढ़ा ______।
  2. नागर जी के सामने इनका साहित्य था ______।

(3) गद्यांश में ढूँढ़कर लिखिए-    (2)

  1. लिंग परिवर्तन
    1. पितामही - ______
    2. सहेली - ______
  2. परिच्छेद से ऐसे दो शब्द ढूँढ़कर लिखिए जिनका वचन परिवर्तन नहीं होता।

(4) 'वाचन व्यक्ति विकास का सोपान है' अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।   (2)

[2.09] जब तक जिंदा रहूँ, लिखता रहूँ
Chapter: [2.09] जब तक जिंदा रहूँ, लिखता रहूँ
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निम्नलिखित अपठित परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

जहाँ कोयल की मीठी वाणी सबका मन मोह लेती है, वहीं कौए को कर्कश आवाज किसी को अच्छी नहीं लगती । मधुर वचन न केवल सुनने वाले को, बल्कि बोलने वाले को भी आत्मिक शांति प्रदान करतें हैं। मनुष्य अपनी सद्भावनाओं का अधिकांश प्रदर्शन वचनों द्वारा ही करता है। मधुर वचन तप्त और दुःखी व्यक्ति का सही और सच्चा उपचार हैं। सहानुभूति के कुछ शब्द उसे इतना सुख देते हैं जितना संसार का कोई धनकोष नहीं दे पाता। मधुरभाषी शीघ्र ही सबका मित्र बन जाता है। लोग उसकी प्रशंसा करते हैं। यहाँ तक कि पराए भी अपने बन जाते हैं। इससे समाज में पारस्परिक सौहार्द की भावना पैदा होती है, लोग एक-दूसरे की सहायता के लिए तत्पर हो जाते हैं। सामाजिक मान-प्रतिष्ठा और श्रद्धा का आधार भी मधुर वाणी ही है। मधुर वचन किसी के मन को ठेस नहीं पहुँचाते, बल्कि दूसरे के क्रोध को शांत करने में सहायक होते हैं। मधुर वाणी में ऐसा आकर्षण है जो बिना रस्सी के सबको बाँध लेती है। अतः याद रखना चाहिए-

ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोए।
औरन को सीतल करे, आपहूँ सीतल होए॥

(1) उत्तर लिखिए-    (2)

गद्यांश के आधार पर मधुर वचन की विशेषताएँ लिखिए-

  1. ____________
  2. ____________

(2) “शब्द शस्त्र के समान होते हैं उनका सावधानी से उपयोग करना चाहिए" वचन पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।   (2)

[5] अपठित विभाग
Chapter: [5] अपठित विभाग
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निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए -

बिना मजदूरी के पेट भर भात पर काम करने वाला कारीगर ! दूध में कोई मिंठाई न मिले तो कोई बात नहीं किन्तु बात में जरा भी झाला बह नहीं बरदाश्त कर सकता। 

'सिरचन को लोक चटोर भी समझते हैं। तली बघारी हुई तरकारी, दही की कढ़ी , मलाईवाला दूध, इन सबका प्रबंध पहले कर लो, 'तब सिरचन को बुलाओ, दुम हिलाता हुआ हाजिर हो जाएगा। खाने-पीने में चिकनाई की कमी हुई कि काम की सारी चिकनाई खत्म ! काम अधूरा रखकर उठ खड़ा होगा- 'आज तो अब अधकपाली दर्द से माथा टनटना रहा हैं थोड़ासा रह गया है, किसी दिन आकर पूरा कर दूँगा।'' किसी दिन' माने कभी नहीं! 

मोथी घास और पटरे की रंगीन शीतलपाटी, बाँस की तीलियों की झिलमिलाती चिक, सतरंगे डोर के मोढ़े, भूसी-चुन्नी रखने के लिए मूँज की रस्सी के बड़े-बड़े जाले, हलवाहों के लिए ताल के सूखे पत्तों की छतरी-टोपी तथा इसी तरह के बहुत-से काम हैं जिन्हें'सिरचन के सिवा गाँव में ओर कोई नहीं जानता। यह दूसरी बात है कि अब गाँव में ऐसे कामों को बेकाम का काम समझते हैं लोग। बेकामका काम जिसकी मजदूरी में अनाज या पैसे देने की कोई जरूरत नहीं। पेट भर खिला दो, काम पूरा होने पर एकाध पूराना- धुराना कपड़ादेकर विदा करो। वह कुछ भी नहीं बोलेगा।....

(1) लिखिए-   (2)

गद्यांश में उल्लेखित सिरचन की पसंद की चीजें-

  1. ____________
  2. ____________

(2) 'हस्तकला को बढ़ावा मिलना चाहिए' विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।   (2)

[1.1] ठेस (पूरक पठन)
Chapter: [1.1] ठेस (पूरक पठन)
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