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Science (Hindi Medium) कक्षा १२ - CBSE Important Questions for Hindi (Elective)

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Hindi (Elective)
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कहानी के पात्रों का चरित्र-चित्रण कथानक की आवश्यकता के अनुसार प्रभावशाली ढंग से कैसे प्रस्तुत किया जाता है। किन्हीं दो तरीकों का वर्णन उदाहरण सहित दीजिए।

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Chapter: [6] कैसे लिखें कहानी
Concept: कैसे लिखें कहानी

निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।

महीं सकल अनरथ कर मूला। सो सुनि समुझि सहिउँ सब सूला॥
सुनि बन गवनु कीन्ह रघुनाथा। करि मुनि बेष लखन सिय साथा॥
बिन पानहिन्ह पयादेहि पाएँ। संकरु साखि रहेउँ ऐहि घाएँ॥
बहुरि निहारि निषाद सनेहू। कुलिस कठिन उर भयउ न बेहू॥
अब सबु आँखिन्ह देखेउँ आई। जिअत जीव जड़ सबइ सहाई॥
जिन्हहि निरखि मग साँपिनि बीछी। तजहिं बिषम बिषु तापस तीछी॥

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Chapter: [6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Concept: भरत-राम का प्रेम

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:

'किसी भी राष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर उसकी आत्मा है।' यह उक्ति भारत जैसे प्राचीन राष्ट्र के संदर्भ में और भी अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाती है। संस्कृति राष्ट्र के जीवन मूल्यों, आदर्शों, दर्शन आदि को मानसिक धरातल पर अभिव्यक्त करने का महत्त्वपूर्ण साधन है। भारत में इसके पीछे हजारों वर्षों के आचरण, व्यवहार, अनुभव, चिंतन, मनन आदि की पूंजी लगी हुई है। कालचक्र के सैकड़ों सुखद एवं दुखद घटनाक्रमों के दौरान कसौटी पर खरे उतर कर उन्होंने अपनी सत्यता व विश्वसनीयता अनेक बार सिद्ध की है। त्याग, संयम, परहित एवं अहिंसा या जीवों पर दया आदि भारतीय संस्कृति के सर्वोच्च मूल्यों में से हैं। संस्कृति और सभ्यता दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। अपने आयु, पद और अनुभव में बड़ों के प्रति आदर भाव, श्रद्धा व सम्मान रखना ही संस्कृति की आत्मा है, उसकी पहचान है। संस्कृति और उसके आदर्श एवं मूल्य एक दिन में निर्मित नहीं होते, वें हजारों वर्षों की अनुभूतियों तथा सिद्धांतों के परिणाम होते हैं। इन आदर्शों व मूल्यों के आधार पर ही राष्ट्रीय संस्कृति निर्मित होती है। इसका निर्माण कार्य ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसका आचरण, व्यावहारिक ज़िंदगी में सहज रूप से अभिव्यक्त होना अर्थात उसका अंगीभाव हो जाना, संस्कृति कहलाता है।

भारतीय संस्कृति का सर्वोच्च मूल्य त्याग है, यह मूल्य हमें पाश्चात्य संस्कृति तथा साम्यवादी संस्कृति की भोगवादी वृत्ति से दूर रखता है। इनकी इस भोगवादी संस्कृति ने आज संपूर्ण मानव जाति को विनाश के कगार पर पहुँचा दिया है और इसी प्रवृत्ति ने मनुष्य और प्रकृति के बीच एक खाई पैदा कर दी है भारतीय संस्कृति सर्वसमावेशक है, जीवमात्र में ईश्वरीय सत्ता की अनुभूति करने वाली है। भारतीय संस्कृति अपने सुखों के लिए दूसरों को नष्ट करने की बर्बरता नहीं रखती। भारतीय संस्कृति में विश्वास करने वाले लोग, राजा से भी अधिक उस संन्यासी को समादृत करते हैं, जो विश्व कल्याण के लिए संयम नियम का पालन करते हुए अपना सर्वस्वार्पण करते हैं।

(क) 'भारत में आचरण, व्यवहार, अनुभव, चिंतन और मनन आदि की पूंजी लगी हुई है' पंक्ति से आशय है?     (1)

  1. जीवन मूल्यों का महत्त्व
  2. ईश्वरीय सत्ता का योगदान
  3. राष्ट्रीय संस्कृति की चेतना
  4. त्याग का उदात्त रूप

(ख) पाश्चात्य संस्कृति तथा साम्यवादी संस्कृति की भोगवादी वृति से बचाव होता है -   (1)

  1. संयम से
  2. अहिंसा से 
  3. मूल्यों से
  4. चिंतन से

(ग) संस्कृति और सभ्यता एक दूसरे के पूरक हैं, क्योंकि ______.    (1)

  1. सभ्यता के भीतर ही संस्कृति का विकास हैं
  2. सांस्कृतिक निर्धारक तत्व ही सभ्यता को परिभाषित करते हैं
  3. सभ्यता व संस्कृति का प्रभाव एक-दूसरे पर पड़ता है
  4. सभ्यता उन्नति है और संस्कृति उदात्तता

(घ) भारतीय संस्कृति पाश्चात्य संस्कृति से किन अर्थों में भिन्न है -   (1)

  1. भोगवाद से मुक्त होने के कारण
  2. भोगवाद से युक्त होने के कारण
  3. उदारता के कारण
  4. स्वार्थ भावना के कारण

(ड) 'समादृत' शब्द का समानार्थी हो सकता है -    (1)

  1. समवयस्क
  2. सम्मानित
  3. सुसंस्कृत
  4. समावेशक

(च) मनुष्य और प्रकृति के बीच खाई पैदा करने के महत्त्वपूर्ण कारण हैं -      (1)

  1. आधुनिकता
  2. भोगवादी दृष्टिकोण
  3. प्रकृति के प्रति उदासीनता
  4. लालची स्वभाव

(छ) संस्कृति के मूल में समाहित है: इस कथन के मूलभाव हेतु निम्नलिखित कथनों को पढ़कर सही विकल्प का चयन कीजिए:  (1)

कथन -

  1. एक राष्ट्र की आत्मा
  2. जीवन मूल्यों, दर्शन का आईना
  3. पाश्चात्य जगत की भोगवादी संस्कृति
  4. आधारभूत तत्वों का अवमूल्यन

विकल्प -

  1. कथन 1 व 4 सही है।
  2. कथन 1 व 2 सही है।
  3. कथन 1, 2, 3 व 4 सही है।
  4. कथन 1 व 3 सही है।

(ज) प्रस्तुत गद्यांश के आधार पर सांस्कृतिक संरक्षण के विषय में कहा जा सकता है -    (1)

  1. सांस्कृतिक व्यवहार का संरक्षण करना
  2. सांस्कृतिक मूल्यों को अपनाना
  3. संस्कृति का हस्तांतरण करना
  4. संरक्षण को व्यावहारिक रूप प्रदान करना

(झ) राष्ट्रीय संस्कृति का निर्माण होता है -    (1)

  1. ईश्वरीय सत्ता के प्रभाव से
  2. विश्व के कल्याण की ओर उन्मुख होने से
  3. आदर्शों व मूल्यों के आधार पर
  4. आर्थिक विकास की ओर अग्रसर होने से 

(ञ) भारतीय संस्कृति में राजा से अधिक संन्यासी को आदर देने का प्रबल कारण है -   (1)

  1. आत्मसंयम
  2. परोपकार
  3. त्याग की भावना
  4. जनप्रियता
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Chapter: [6] अपठित विभाग
Concept: अपठित गद्यांश

दिए गए पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:

हम जंग न होने देंगे!
विश्व शांति के हम साधक हैं, जंग न होने देंगे!

कभी न खेतों में फिर खूनी खाद फलेगी,
खलिहानों में नहीं मौत की फसल खिलेगी,
आसमान फिर कभी न अंगारे उगलेगा,
एटम से नागासाकी फिर नहीं जलेगी,

युद्धविहीन विश्व का सपना भंग न होने देंगे।
जंग न होने देंगे।

हथियारों के ढेरों पर जिनका है डेरा,
मुँह में शांति, बगल में बम, धोखे का फेरा,
कफन बेचने वालों से कह दो चिल्लाकर,
दुनिया जान गई है उनका असली चेहरा,
कामयाब हो उनकी चालें, ढंग न होने देंगे।
जंग न होने देंगे।

हमें चाहिए शांति, जिंदगी हमको प्यारी,
हमें चाहिए शांति, सृजन की है तैयारी,
हमने छेड़ी जंग भूख से, बीमारी से,
आगे आकर हाथ बटाए दुनिया सारी।
हरी-भरी धरती को खूनी रंग न लेने देंगे
जंग न होने देंगे।

(क) इस कविता के केन्द्रीय भाव हेतु दिए गए कथनों को पढ़कर उचित विकल्प का चयन कीजिए -  (1)

कथन

  1. आंतरिक वैमनस्य को विस्मृत करना
  2. विश्व-शांति के मार्ग पर अग्रसर होना
  3. युद्ध की नई तकनीकों पर विचार करना
  4. एटम-बम से ऐतिहासिक परचम लहराना

विकल्प -

  1. कथन 1 व 2 सही है।
  2. कथन 1, 2, 3 व 4 सही है।
  3. कथन 1 व 4 सही है।
  4. कथन 1 व 3 सही है।

(ख) 'खलिहानों में नहीं मौत की फसल खिलेगी,' प्रस्तुत पंक्ति में मौत की फसल से तात्पर्य है -   (1)

  1. युद्ध के कारण किसानों की मेहनत विफल नहीं होगी।
  2. प्रकृति का विनाश नहीं होगा।
  3. युद्ध अपार जन-हानि का कारण नहीं बनेगा।
  4. हरित सौन्दर्य रक्ताभ रूप में नहीं दिखेगा।

(ग) 'मुँह में शांति, बशल में बम, धोखे का फेरा' रेखांकित वाक्यांश के भाव को स्पष्ट कीजिए -    (1)

  1. छोटा मुँह बड़ी बात
  2. मुँह में राम बगल में छुरी
  3. बारूद की पुड़िया होना
  4. दिल छोटा करना

(घ) अपनी आँखों में कवि ने दुनिया का सपना सँजोया है -   (1)

  1. जहाँ युद्ध मात्र विकल्प हो
  2. जहाँ सर्वत्र शांति बयार चल रही हो
  3. हथियारों के ढेरों पर डेरा जमाना है
  4. हरी-भरी धरा का सपना

(ड) 'कफन बेचने वाले' कहकर कवि की लेखनी उद्घाटित करना चाह रही है -   (1)

  1.  वे मुल्क जो हथियारों की खरीद-फ़रोख्त करते हैं। 
  2. वे मुल्क जो कफन बेचने वालों को ललकार रहे हैं।
  3. वे मुल्क जो विश्व-शांति के लिए हथियारों की खरीद-फ़रोख्त करते हैं।
  4. वे मुल्क जो अन्य मुल्कों को गुलाम बनाना चाहते हैं।

(च) 'आसमान फिर न अँगारे उगलेगा' पंक्ति में अँगारे उगलने का तात्पर्य है -   (1)

  1. परमाणु परीक्षण पर पाबंदी से
  2. सौरमंडल में सूर्य की दशा परिवर्तन से
  3. परमाणु विस्फोट करने से
  4. भुखमरी के कारण मृत्युदर में वृद्धि

(छ) नागासाकी फिर नहीं जलेगी के माध्यम से कवि का अभिप्राय है -   (1)

  1. विश्व-शांति को विस्तारित करना
  2. हिरोशिमा नागासाकी को याद करना
  3. विश्व को अस्तर-शस्त्र रहित बनाना
  4. संसार में अस्त्र-शस्त्र का प्रचार-प्रसार करना

(ज) कवि ने किसके विरुद्ध रण की तान छेड़ रखी है -   (1)

  1. खेत-खलिहान खाद के विरुद्ध
  2. नव-सृजन की बात कहने के लिए
  3. निर्धनता व भुखमरी को संघर्षहीन बनाने के लिए
  4. हरित धरा को लहूलुहान होने से बचाने के लिए
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Chapter: [6] अपठित विभाग
Concept: अपठित पद्यांश

निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर 60 शब्दों में लिखिए -

कहानी का हमारे जीवन से क्या संबंध है? परिभाषित कीजिए।

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Chapter: [6] कैसे लिखें कहानी
Concept: कैसे लिखें कहानी

निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए -

पुलकि सरीर सभाँ भए ठाढ़े। नीरज नयन नेह जल बाढ़े॥
कहब मोर मुनिनाथ निबाहा। एहि तें अधिक कहौं मैं काहा॥
मैं जानउँ निज नाथ सुभाऊ। अपराधिहु पर कोह न काऊ॥
मो पर कृपा सनेहू बिसेखी। खेलत खुनिस न कबहूँ देखी॥
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Chapter: [6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Concept: भरत-राम का प्रेम

भरत का आत्म परिताप उनके व्यक्तित्व के किस पक्ष की ओर संकेत करता है? वर्तमान में ऐसे व्यक्तित्व की आवश्यकता सिद्ध कीजिए।

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Chapter: [6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Concept: भरत-राम का प्रेम

बारहमासा का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।

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Chapter: [7] मलिक मुहम्मद जायसी : बारहमासा
Concept: बारहमासा

माघ के मास में विरहिणी के भावों को अपने शब्दों में लिखिए।

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Chapter: [7] मलिक मुहम्मद जायसी : बारहमासा
Concept: बारहमासा

आशय स्पष्ट कीजिए -

जनम अबधि हम रूप निहारल नयन न तिलपित भेल॥

सेहो मधुर बोल स्रवनहि सूनल स्रुति पथ परस न गेल॥

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Chapter: [8] विद्यापति : पद
Concept: विद्यापति

आशय स्पष्ट कीजिए।

अधर लगे हैं आनि करि कै पयान प्रान,
चाहत चलन ये सैंदेसो लै सुजान को।

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Chapter: [9] घनानंद : कवित्त
Concept: कवित्त

रटंत या कुटेव को बुरी लत क्यों कहा गया है? नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन द्वारा इस लत से कैसे बचा जा सकता है?

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Chapter: [9] नए अप्रत्याशित विषयों पर लेखन
Concept: नए अप्रत्याशित विषयों पर लेखन

‘भारतेंदु जी के मकान के नीचे का यह ह्दय परिचय बहुत शीघ्र गहरी मैत्री में परिणत हो गया।’- कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।

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Chapter: [10] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
Concept: प्रेमघन की छाया-स्मृति

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए -

चौधरी साहब एक खासे हिंदुस्तानी रईस थे। वसंत पंचमी होली इत्यादि, अवसरों पर उनके यहाँ खूब नाचरंग और उत्सव हुआ करते थे। उनकी हर एक अदा से रियासत और तबीयतदारी टपकती थी। कंधों तक बाल लटक रहे हैं। आप इधर से उधर टहल रहे हैं। एक छोटा-सा लड़का पान की तश्तरी लिए पीछे-पीछे लगा हुआ है। बात की काट-छाँट का क्या कहना है। जो बातें उनके मुँह से निकलती थीं, उनमें एक विलक्षण वक्रता रहती थी। उनकी बातचीत का ढंग उनके लेखों के ढंग से एकदम निराला होता था। नौकरों तक के साथ उनका संवाद सुनने लायक होता था।

(क) प्रस्तुत गद्यांश में किस की विशेषताओं का वर्णन किया गया है?   (1)

  1. भारतेंदु की
  2. राधेश्याम की
  3. रामचंद्र की
  4. बदरीनारायण की

(ख) चौधरी साहब एक खासे हिन्दुस्तानी रईस थे, खासे रईस से तात्पर्य है -     (1)

  1. दिखावा करने वाला
  2. उत्सव मनाने वाला
  3. गंभीर व्यक्तित्व वाला
  4. व्यंग्य करने वाला

(ग) चौधरी साहब की बातचीत के अंदाज़ से यह पता चलता है कि वे खासे हिंदुस्तानी रईस के साथ-साथ ______थे।   (1)

  1. साहित्य प्रेमी
  2. भाषानुरागी
  3. रसिक धर्मी
  4. सौन्दर्य प्रेमी

(घ) प्रस्तुत गद्यांश में 'विलक्षण वक्रता' से तात्पर्य स्पष्ट होता?    (1)

  1. मुहावरेदार
  2. कुटिलता
  3. वाक्‌ चातुर्य
  4. अनोखी वचन भंगिमा

(ङ) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और सही विकल्प चुनकर लिखिए।    (1)

कथन - हर एक अदा से रियासत और तबीयतदारी टपकती थी।'

कारण - चौधरी साहब की गिनती धनी व्यक्तियों में होती थी। सहृदयता के लिए भी प्रसिद्ध थे।

  1. कथन (A) सही है और कारण (R) सही व्याख्या है।
  2. कथन (A) और कारण (R) दोनों ही गलत है।
  3. कथन (A) सही है किंतु कारण गलत है।
  4. कथन (A) सही है किंतु कारण (R) सही व्याख्या नहीं है।
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Chapter: [10] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
Concept: प्रेमघन की छाया-स्मृति

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनिए -

बालक के मुख पर विलक्षण रंगों का परिवर्तन हो रहा था, हृदय में कृत्रिम और स्वाभाविक भावों की लड़ाई की झलक आँखों में दीख रही थी। कुछ खाँसकर, गला साफ़ कर नकली परदे के हट जाने पर स्वयं विस्मित होकर बालक ने धीरे से कहा, ‘लड्डू’। पिता और अध्यापक निराश हो गए। इतने समय तक मेरा श्वास घुट रहा था। अब मैंने सुख से साँस भरी। उन सबने बालक की प्रवृत्तियों का गला घोंटने में कुछ उठा नहीं रखा था। पर बालक बच गया।उसके बचने की आशा है क्योंकि वह ‘लड्डू’ की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों का मधुर मर्मर था, मरे काठ की अलमारी की सिर दुखाने वाली खड़खड़ाहट नहीं।

(1) ‘बच्चे के मुख पर रंग बदल रहे थे।’ इस पंक्ति के आधार पर आकलन करने से ज्ञात होता है कि बच्चे में उठ रहे भाव ______ के हैं। (1)

(क) सहृदयता
(ख) घबराहट
(ग) अंतरद्वंद्व
(घ) रोमांचकता

(2) गद्यांश के आधार पर कौन-सा वाक्य सही है? (1)

(क) काठ की अलमारी सदैव सिर दुखाती है।
(ख) शिक्षा प्रणाली पर व्यंग्य किया गया है।
(ग) बच्चों को पढ़ाना अत्यंत सहज कार्य है।
(घ) वृक्ष के हरे पतों का संगीत मधुर होता है।

(3) बालक द्वारा धीरे से लड्डू कहना दर्शाता है कि - (1)

(क) छोटी वस्तु भी पुरस्कार है।
(ख) कृत्रिमता का लबादा उतर गया।
(ग) कृत्रिमता का स्थायित्व संभव है।
(घ) लेखक का उद्देश्य पूरा हो गया।

(4) ‘अब मैंने सुख की साँस भरी’ के माध्यम से कह सकते हैं कि वह - (1)

(क) अत्यंत जागरूक नागरिक हैं।
(ख) बाल मनोविज्ञान से परिचित हैं।
(ग) स्तरानुसार शिक्षा के पक्षधर हैं।
(घ) अपने सुख की कामना करते हैं।

(5) गद्यांश हमें संदेश देता है कि - (1)

(क) स्वाभाविक विकास हेतु सहज एवं आनंदपूर्ण वातावरण होना चाहिए।
(ख) रटंत प्रणाली के कारण बच्चे की हृदय व्यथा चिंताजनक हो जाती है।(ग) बालक में निडरता थी तभी अपनी लड्डू की इच्छा को प्रकट कर पाया है।
(घ) अभिभावक एवं अध्यापकों को बालकों का चहुँमुखी विकास करना चाहिए।

(6) निम्नलिखित कथन कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए - (1)

कथन (A): लड़डू की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों का मधुर मर्मर था।

कारण (R): बालक द्वारा लड्डू माँगा जाना वृक्ष के हरे पत्तों के समान इंगित करता है।

(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।
(ग) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(घ) कथन (A) सही है लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।

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Chapter: [11] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
Concept: सुमिरिनी के मनके

घड़ीसाज़ी का इम्तहान पास करने से लेखक के अभिप्राय को स्पष्ट कीजिए।

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Chapter: [11] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
Concept: सुमिरिनी के मनके

निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए -

बालक के मुख पर विलक्षण रंगों का परिवर्तन हो रहा था, हृदय में कृत्रिम और स्वाभाविक भावों की लड़ाई की झलक आँखों में दिख रही थी। कुछ खाँसकर, गला साफ़ कर नकली परदे के हट जाने पर स्वयं विस्मित होकर बालक ने धीरे से कहा, 'लड्‌डू'। पिता और अध्यापक निराश हो गए। इतने समय तक मेरा श्वास घुट रहा था। अब मैंने सुख से साँस भरी। उन सबने बालक की प्रवृत्तियों का गला घोंटने में कुछ उठा नहीं रखा था। पर बालक बच गया। उसके बचने की आशा है क्योंकि वह 'लड्‌डू' की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों पर मधुर मर्मर था, मरे काठ की अलमारी की सिर दुखाने वाली खड़खड़ाहट नहीं।
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Chapter: [11] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
Concept: सुमिरिनी के मनके

‘उसके पैर गाँव की ओर बढ़ ही नहीं रहे थे। इसी पगडंडी से बड़ी बहुरिया अपने मैके लौटा आवेगी गाँव छोड़कर चली जावेगी। फिर कभी नहीं आवेगी।’

लेखक संवदिया और बड़ी बहुरिया के माध्यम से समाज के एक बड़े वर्ग का वर्णन करत प्रतीत हो रहे हैं। इसे स्पष्ट करते हुए वर्तमान परिप्रेक्ष्य के साथ संबंध स्थापित कीजिए।

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Chapter: [12] फणीश्वरनाथ 'रेणु' : संवदिया
Concept: संवदिया

'बड़ी बहुरिया का संवाद हरगोबिन सुना सकने में असमर्थ था' कथन के माध्यम से हरगोबिन की तत्कालीन स्थिति की विवेचना कीजिए।

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Chapter: [12] फणीश्वरनाथ 'रेणु' : संवदिया
Concept: संवदिया

असगर वजाहत द्वारा लिखी लघुकथाओं में से कौन-सी लघुकथा आपको सर्वाधिक प्रभावित करती है और क्यों? स्पष्ट कीजिए।

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Chapter: [14] असगर वजाहत : शेर, पहचान, चार हाथ, साझा
Concept: असगर वजाहत
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