Advertisement Remove all ads

पोटेशियोमीटर (विभवमापी)

Advertisement Remove all ads

Topics

description

  • पोटेंशियोमीटर सिद्धांत
  • पोटेंशियोमीटर का उपयोग
  1. Emf की तुलना करने के लिए
  2. सेल का आंतरिक प्रतिरोध (r) ज्ञात करने के लिए
  3. पोटेंशियोमीटर का अनुप्रयोग
  1. वोल्टता विभक्त
  2. ऑडियो नियंत्रण
  3. सेंसर के रूप में पोटेंशियोमीटर
  • वोल्टमीटर पर पोटेंशियोमीटर के लाभ
  1. गुण
  2. दोष
If you would like to contribute notes or other learning material, please submit them using the button below.

Related QuestionsVIEW ALL [2]

चित्र में एक पोटेशियोमीटर दर्शाया गया है। जिसमें एक 2.0 V और आन्तरिक प्रतिरोध 0.40 Ω का कोई सेल, पोटेशियोमीटर के प्रतिरोधक तार AB पर वोल्टता पात बनाए A रखता है। कोई मानक सेल जो 1.02 V का अचर विद्युत वाहक बल बनाए रखता है (कुछ mA की बहुत सामान्य धाराओं के लिए) तार की 67.3 cm लम्बाई पर सन्तुलन बिन्दु देता है। मानक सेल से अति न्यून धारा लेना सुनिश्चित करने के लिए । इसके साथ परिपथ में श्रेणी 600 kΩ का एक अति उच्च प्रतिरोध इसके साथ सम्बद्ध किया जाता है, जिसे सन्तुलन बिन्दु प्राप्त होने के निकट लघुपथित (shorted) कर दिया जाता है। इसके बाद मानक सेल को किसी अज्ञात विद्युत वाहक बल E के सेल से प्रतिस्थापित कर दिया जाता है जिससे सन्तुलन बिन्द तार की 82.3 cm लम्बाई पर प्राप्त होता है।

  1. E का मान क्या है?
  2. 600 kΩ के उच्च प्रतिरोध का क्या प्रयोजन है?
  3. क्या इस उच्च प्रतिरोध से सन्तुलन बिन्दु प्रभावित होता है?
  4. क्या परिचालक सेल के आन्तरिक प्रतिरोध से सन्तुलन बिन्दु प्रभावित होता है?
  5. उपर्युक्त स्थिति में यदि पोटेशियोमीटर के परिचालक सेल का विद्युत वाहक बल 2.0 V के स्थान पर 1.0 V हो तो क्या यह विधि फिर भी सफल रहेगी?
  6. क्या यह परिपथ कुछ mV की कोटि के अत्यल्प विद्युत वाहक बलों (जैसे कि किसी प्रारूपी तापविद्युत युग्म का विद्युत वाहक बल) के निर्धारण में सफल होगी? यदि नहीं, तो आप इसमें किस प्रकार संशोधन करेंगे?

Advertisement Remove all ads
Share
Notifications

View all notifications


      Forgot password?
View in app×